छपरा में एक बेटी के साथ हुई अमानवीय घटना पर सियासी घमासान मचा है. पप्पू यादव ने बिहार पुलिस पर पीड़िता और उसके परिवार को कलंकित करने का आरोप लगाया है. बिहार के छपरा में एक बेटी के साथ हुई भयावह और अमानवीय घटना को लेकर सियासी पारा गरमा गया है. इस जघन्य अपराध के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. सांसद पप्पू यादव ने इस मामले में बिहार पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए उस पर मृतक बेटी और उसके पीड़ित परिजनों को कलंकित करने का संगीन आरोप लगाया है.
पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने पुलिस प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपनी इस शर्मनाक हरकत से बाज आए. अपने बयान में पप्पू यादव ने बिहार पुलिस पर एक पैटर्न के तहत काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, “बिहार पुलिस की यह आदत सी हो गई है कि जब भी राज्य में किसी बेटी पर जुल्म या दरिंदगी होती है, तो पुलिस न्याय दिलाने के बजाय उल्टे पीड़िता के चरित्र पर ही सवाल उठाने लगती है.” उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिजनों को ही कटघरे में खड़ा कर देता है, ताकि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके.

पप्पू यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन के इस असंवेदनशील और पीड़ित-विरोधी रवैये को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने इस अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ने का ऐलान किया है.
छपरा की इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है और महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है. पप्पू यादव का यह आरोप इस ओर इशारा करता है कि पुलिस निष्पक्ष जांच करने के बजाय अक्सर ‘विक्टिम ब्लेमिंग’ (Victim Blaming) का सहारा लेती है. उनके इस कड़े रुख के बाद स्पष्ट है कि अगर पुलिस ने अपनी जांच की दिशा नहीं बदली और पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा नहीं दिलाया, तो वे इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतर सकते हैं. अब देखना यह है कि पुलिस मुख्यालय इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है.


