RAJASTHAN : अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में मारपीट, नर्सिंग स्टाफ और रेजिडेंट डॉक्टर के बीच हाथापाई

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रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलराज मीना ने आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टर ने मरीज के लिए कुछ काम करने के निर्देश दिए लेकिन ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने उनके आदेश को नहीं माना.

राजस्थान के अजमेर में जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ और रेजिडेंट डॉक्टर के बीच हाथापाई और मारपीट का मामला सामने आया है. नवजात शिशु इनटेंसिव केयर यूनिट में मास्क और टोपी के मुद्दे पर नर्सिंग स्टाफ और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच विवाद हो गया. दोनों पक्षों के बीच ये मामला मारपीट तक पहुंच गया. दोनों पक्षों ने शिकायत दर्ज कराई है और अस्पताल प्रशासन जांच कर रहा है.

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलराज मीना ने कहा, “थर्ड ईयर के रेजिडेंट डॉक्टर आईसीयू में ड्यूटी पर थे इसलिए उन्होंने स्टाफ को मरीज के लिए कुछ काम करने के निर्देश दिए लेकिन ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने उनके आदेश को नहीं माना. फिर उन्होने अपने नर्सिंग इंचार्ज को सूचित किया कि आपका स्टाफ हमारी बात नहीं सुन रहा है.”

उन्होंने कहा, ”डॉक्टर कोई अपना पर्सनल काम नहीं करा रहे थे. बच्चे के हेल्थ के लिए, इमरजेंसी में जो जरूरत होती है, उसमें को-ऑपरेट करने के लिए उन्होंने बोला तो दो लोगों ने उनकी पिटाई कर दी. विनोद नाम के व्यक्ति ने इनको पकड़ा और एक सुरेश चौधरी हैं, जिन्होंने इनके साथ मारपीट की. इसके बाद छुड़ा दिया गया और वो वापस से फिर आए और चप्पल से मारा, जो सीसीटीवी मैंने आपको उपलब्ध करवा दी है. थोड़ी देर बाद लोहे की गोल तस्तरी जैसी चीज लेकर आए, अगर उससे चोट लगती तो गंभीर चोट आने की संभावना थी. डॉक्टर साहब के बाहर आने बाद उनके साथ तीन-चार बार मारपीट करने की कोशिश की गई.”

दिलराज मीना ने ये भी कहा, ”हम अभी कॉलेज प्रशासन से मिले हैं, उन्होंने हमें शाम तक का टाइम दिया है. इंटेंसिव केयर यूनिट में कई लोगों की जरूरत रहती है, वहां अकेले डॉक्टर ही काम नहीं करते. प्रोटकॉल के हिसाब से हर बेड पर एक नर्सिंग स्टाफ दिया हुआ है, जो WHO की गाइडलाइन है. ऐसे में डॉक्टर के साथ स्टाफ की भी उतनी ही ड्यूटी बनती है. उनसे काम करवाने का डॉक्टर का फर्ज है. वही काम डॉक्टर ने उनसे करने के लिए कहा था लेकिन शायद स्टाफ ने नशा कर रखा था या क्या कर रखा था ये भगवान जाने. अगर कोई मरीज के हित में कोई बात बोल रहा है तो उसमें गुस्सा होने की बात ही नहीं है. पहले हमें पब्लिक मारती थी और अब हमारा नर्सिंग स्टाफ मारने लग गया है.”

पीड़ित रेजिडेंट डॉक्टर चंद्र प्रकाश ने बताया, “जब मैंने एक मरीज के बारे में स्टाफ से कुछ पूछा तो उन्होंने इसे अनदेखा कर दिया. मैंने इस बारे में इंचार्ज को बताया, तो मैंने इंचार्ज को इस बारे में बताने की कोशिश की. इंचार्ज ने इसे पूरी तरह से नजरअंदाज किया. साथ ही स्टाफ ने बहसबाजी करनी शुरू कर दी. मुझ पर उंगली उठाकर बात करने लगा कि तुम बाहर निकलो. फिर उन्होंने हाथपाई स्टार्ट कर दी. एक व्यक्ति ने मुझे पकड़ लिया और दूसरे ने मारपीट की. उसने चप्पल फेंककर मारी, यहां तक कि धारदार चीज से भी मारने की कोशिश की. मैंने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई है और कुछ कार्रवाई नहीं की जाती है तो आगे कदम उठाएंगे”.

 

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