BUSINESS : युद्ध के बीच सस्ती हो गई थाली, आलू-प्याज ने दी राहत, जानें वेज-नॉनवेज प्लेट का हाल

0
58

ईरान में जंग और मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच मार्च में नॉन-वेज थाली की कीमत पिछले साल के मुकाबले 1 परसेंट कम हुई है, जबकि वेज थाली की कीमत स्थिर रही.

IANS ईरान में जंग के बीच क्रिसिल (CRISIL) की रिपोर्ट में एक चौंकानेवाली रिपोर्ट सामने आई है. इसके मुताबिक, मार्च 2026 में घर पर बनी नॉन-वेज थाली की कीमत में पिछले साल के मुकाबले एक परसेंट की गिरावट आई है. जबकि इस दौरान शाकाहारी थाली की कीमतें स्थिर रहीं.

दरअसल, इस दौरान आलू, प्याज और दाल की कीमत में आई कमी ने टमाटर, वनस्पति तेल और ईंधन से जुड़े बढ़ते खर्चों की भरपाई कर दी है, जिससे कीमतों में अंतर देखी जा रही है.

Crisil की रिपोर्ट में खुलासा
Crisil Intelligence की हालिया ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार, वेज और नॉन-वेज थाली को बनाने की औसत लागत का हिसाब पूरे उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में चल रही इनपुट कीमतों के आधार पर लगाया गया. इस मासिक रिपोर्ट में आम आदमी के खर्च पर इन कीमतों में बदलाव के असर को दिखाया गया है और अनाज, ब्रॉयलर चिकन और मसालों जैसी खास चीजों इस बदलाव का मुख्य कारण बताया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “मार्च में नॉन-वेज थाली की कीमत पिछले साल के मुकाबले 1 परसेंट कम हुई है, जबकि वेज थाली की कीमत स्थिर रही. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आलू, प्याज और दालों की कम कीमतों ने टमाटर, वनस्पति तेल और ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों के असर को कम कर दिया.”

इस तरह से बैलेंस हुआ कॉस्ट
बेशक इस साल मार्च में पश्चिम एशिया में तनाव के बीच एडिबल ऑयल (6%), कुकिंग गैस (14%), टमाटर की कीमतें (33%) बढ़ीं, लेकिन इसी बीच आलू-प्याज की कम हुई कीमत ने बढ़ती हुई लागत को कम कर दिया. नॉन-वेज थाली भी मार्च 2025 के मुकाबले मार्च 2026 में 1 परसेंटसस्ती इसलिए रही क्योंकि इस दौरान ब्रॉयलर की कीमतों में 2 परसेंट तक की गिरावट आई है.

क्यों सस्ता हुआ आलू-प्याज?
मार्च में आलू की कीमत में 13 परसेंट और प्याज की कीमत में 25 परसेंट तक की गिरावट आई. ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान इन फसलों की आवक बंपर रही. ऊपर से जंग के चलते निर्यात में आई मुश्किलों से देश में स्टॉक बढ़ता गया. कोल्ड स्टोरेज और मंडियों से पुराने स्टॉक निकाले जाने लगे, इससे कीमत कम हो गई.

ब्रॉयलर की क्यों कम हुई कीमत?
एक तो मार्च में नवरात्रि के चलते डिमांड कम हुई. ऊपर से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रॉफिट मार्जिन को लेकर चिकन रिटेलर्स और पोल्ट्री कंपनियों के बीच विवाद के चलते भी कीमत में 2 परसेंट तक की गिरावट आई.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here