Business : शेयर बाजार में बढ़ सकता है उतार-चढ़ाव, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे. आइए जानते हैं, मार्केट की चाल के विषय में. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे. विश्लेषकों ने कहा कि इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले और मुद्रास्फीति के आंकड़े भी बाजार को प्रभावित करेंगे. आइए जानते हैं, 16 मार्च से शुरू हो रहे सप्ताह में मार्केट की चाल के विषय में.

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध उपाध्यक्ष अजित मिश्रा ने कहा कि यह सप्ताह घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और आंकड़ों से भरा है. उन्होंने बताया कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों पर उनका प्रभाव बाजार की समग्र दिशा को प्रभावित कर सकता है. घरेलू मोर्चे पर, बाजार थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन के आंकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों पर नजर रखेंगे.

लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के. ने बताया कि वैश्विक जोखिम धारणा बिगड़ने, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय बाजार पिछले सप्ताह भारी दबाव में रहे. पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी में 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

पिछले महीने 27 फरवरी से अब तक सेंसेक्स 6,723.27 अंक या 8.27 प्रतिशत नीचे आ चुका है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति को सख्त बना सकता है, जिससे एशिया में मुद्रास्फीति बढ़ सकती हैं. एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि आने वाले सप्ताह में काफी उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है. पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण पोत परिवहन में होने वाली किसी भी देरी के चलते भारत जैसे उभरते बाजारों में वैश्विक पूंजी आवंटन पर असर पड़ सकता है.

विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले पखवाड़े में घरेलू शेयरों से लगभग 52,704 करोड़ रुपये निकाले हैं. इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव, रुपये की कमजोरी और भारतीय वृद्धि दर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का प्रभाव है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इस सप्ताह निवेशकों की नजर यूरो क्षेत्र के सीपीआई आंकड़ों, बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) और यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) के नीतिगत फैसलों तथा अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों पर भी रहेगी.

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