BUSINESS : गूगल को कानूनी नोटिस, जेमिनी AI का इस्तेमाल कर यूजर्स का डेटा चोरी का करने आरोप

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याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि गूगल ने 1967 में बने “California Invasion of Privacy Act” का उल्लंघन किया है. यह कानून बिना सभी पक्षों की सहमति के निजी संवाद की रिकॉर्डिंग या एक्सेस को प्रतिबंधित करता है.

दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब विवादों के घेरे में आ गई है. जहां एक ओर कंपनियां एआई के जरिए उत्पादकता बढ़ाने और लागत घटाने की दिशा में काम कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर, टेक दिग्गज गूगल पर अपने एआई असिस्टेंट “जेमिनी” के जरिए यूजर्स की निजी जानकारी ट्रैक करने का गंभीर आरोप लगा है.

कैलिफोर्निया के सैन जोस फेडरल कोर्ट में दायर एक याचिका में दावा किया गया है कि गूगल ने जेमिनी एआई असिस्टेंट का इस्तेमाल कर यूजर्स के निजी कम्युनिकेशन डेटा — जैसे Gmail, चैट और Meet — को गुप्त तरीके से ट्रैक किया.

हलफनामे में कहा गया है कि पहले इन प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स को एआई प्रोग्राम को “टर्न ऑन” करने का विकल्प दिया जाता था, लेकिन अक्टूबर 2025 में Alphabet Inc. ने बिना किसी सूचना के इन सभी एप्लिकेशन में जेमिनी को डिफॉल्ट रूप से “ऑन” कर दिया. इस प्रक्रिया में यूजर्स की अनुमति लिए बिना उनके निजी डेटा — ईमेल, अटैचमेंट्स और चैट हिस्ट्री — तक पहुंच हासिल की गई.

याचिका में यह भी कहा गया है कि गूगल ने यूजर्स को जेमिनी को “टर्न ऑफ” करने का विकल्प तो दिया है, लेकिन यह विकल्प प्राइवेसी सेटिंग्स के अंदर गहराई में छिपा हुआ है, जहां सामान्य यूजर का पहुंचना मुश्किल है. जब तक यूजर इस टूल को मैन्युअली डिएक्टिवेट नहीं करता, तब तक गूगल को उसके सारे ईमेल और अटैचमेंट्स तक एक्सेस बना रहेगा.

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि गूगल ने 1967 में बने “California Invasion of Privacy Act” का उल्लंघन किया है. यह कानून बिना सभी पक्षों की सहमति के निजी संवाद की रिकॉर्डिंग या एक्सेस को प्रतिबंधित करता है.

जेमिनी, गूगल का एडवांस्ड एआई असिस्टेंट है, जिसे चैटिंग, ईमेल कम्पोज़िंग, मीटिंग समरी और डेटा विश्लेषण जैसे कार्यों के लिए तैयार किया गया है. कंपनी का दावा है कि जेमिनी “यूजर्स की सुविधा” के लिए बनाया गया है, लेकिन अब उस पर प्राइवेसी उल्लंघन के गंभीर आरोप लग चुके हैं. कोर्ट ने गूगल को नोटिस जारी करते हुए इस मामले पर स्पष्टीकरण देने को कहा है. अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल गूगल की साख के लिए बड़ा झटका साबित होगा, बल्कि एआई डेटा प्राइवेसी को लेकर वैश्विक बहस को भी नया मोड़ दे सकता है.

जहां एक ओर एआई इंसानों का काम आसान बना रहा है, वहीं दूसरी ओर यूजर्स की निजता (Privacy) पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं. अब देखना यह होगा कि कोर्ट का फैसला इस एआई विवाद को किस दिशा में ले जाता है.

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