BUSINESS : कॉटन इंपोर्ट पर ड्यूटी छूट से MSME टेक्सटाइल यूनिट्स को मिलेगा बड़ा फायदा, सस्ता होगा कच्चा माल

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केंद्र सरकार द्वारा 30 अक्टूबर 2026 तक कॉटन इंपोर्ट पर सभी कस्टम ड्यूटी हटाने के फैसले का टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने स्वागत किया है। टेक्सटाइल मंत्रालय ने कहा कि यह कदम घरेलू इंडस्ट्री के लिए कॉटन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, प्रोडक्शन कॉस्ट को कम करेगा और इंडियन टेक्सटाइल प्रोडेक्ट्स की ग्लोबल प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाएगा। वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार यह ड्यूटी छूट 1 जून 2026 से प्रभावी होगी। मंत्रालय ने कहा कि कपास के ऑफ-सीजन के दौरान लागू किया गया यह फैसला टेक्सटाइल इंडस्ट्री, विशेष रूप से MSME इकाइयों को राहत देगा। इससे कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी, इनपुट कॉस्ट पर दबाव कम होगा और किसानों के हितों की रक्षा के साथ बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) ने इसे अपैरल इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत बताया है। AEPC के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि कपास और यार्न की बढ़ती कीमतों से जूझ रही छोटी और मध्यम इकाइयों को इस फैसले से बड़ा फायदा होगा। उन्होंने स्पिनिंग मिलों से भी अपील की कि वे सस्ती कॉटन का लाभ यार्न की कीमतों में कमी के रूप में आगे बढ़ाएं, ताकि पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन को फायदा मिल सके और निर्यातक अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर ऑर्डर हासिल कर सकें।

इंडस्ट्री के लिए क्या थी बड़ी बाधा
वहीं कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टैक्सटाइल इंडस्ट्री के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच कपास पर 11 फीसदी आयात शुल्क भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए बड़ी बाधा बन गया था, जबकि एशिया के कई प्रतिस्पर्धी देशों को ड्यूटी-फ्री कपास उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क के कारण पूरी वैल्यू चेन में लागत बढ़ रही थी और भारत के टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ाने के प्रयास प्रभावित हो रहे थे।

भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट मुख्य रूप से कपास आधारित है और देश ने वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल एवं अपैरल एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है। इंडस्ट्री का मानना है कि कॉटन इंपोर्ट पर अस्थायी ड्यूटी छूट से भारतीय निर्यातक विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से मिलने वाले अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकेंगे और ग्लोबल बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेंगे।

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