BUSINESS : क्या कर अधिकारियों से छिनेगा सीधे गिरफ्तारी का अधिकार? जानें आगामी बैठक के बड़े प्रस्ताव

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7 अक्तूबर की जीएसटी काउंसिल बैठक में टैक्स अफसरों के सीधे गिरफ्तारी अधिकार खत्म करने और न्यायिक मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर फैसला संभव है। फर्जी आईटीसी और कानूनी बदलावों की पूरी रिपोर्ट पढ़ें और ताजा अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के प्रवर्तन ढांचे में जल्द ही बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। कानून के गैर-अपराधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए टैक्स अधिकारियों से करदाताओं को सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लिया जा सकता है। सितंबर 2025 में आयोजित 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में कर दरों के सरलीकरण पर बड़े निर्णय लिए गए थे। अब 7 अक्तूबर 2026 को होने जा रही 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में प्रवर्तन संबंधी नीतिगत सुधारों को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। यदि केंद्रीय और राज्य वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद इस प्रस्ताव को हरी झंडी देती है, तो जीएसटी प्रवर्तन विभागीय गिरफ्तारी से हटकर अदालती निगरानी के अधीन आ जाएगा।

वर्तमान जीएसटी कानून में गिरफ्तारी के क्या नियम हैं?
मौजूदा व्यवस्था के तहत सेंट्रल जीएसटी एक्ट की धारा 69 टैक्स अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार प्रदान करती है। इसके अंतर्गत कमिश्नर स्तर के अधिकारियों के पास यह शक्ति है कि वे कानून में निर्दिष्ट गंभीर अपराधों के संदेह में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का आदेश दे सकें।

गिरफ्तारी के आधार: गिरफ्तारी का यह अधिकार मुख्य रूप से फर्जी बिल जारी करने, धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने व उसका उपयोग करने और ग्राहकों से टैक्स वसूल कर सरकार के पास जमा न कराने जैसे गंभीर मामलों तक सीमित है। अपराधों का वर्गीकरण: कानून में 5 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े को संज्ञेय और गैर-जमानती माना गया है, जबकि 5 करोड़ रुपये से कम की राशि वाले मामले जमानती होते हैं।

अदालती प्रक्रिया: कमिश्नर की मंजूरी के बाद कर अधिकारी स्थानीय पुलिस की मदद से गिरफ्तारी करते हैं। गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है, जहां रिमांड या जमानत का फैसला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) के तहत अदालत द्वारा किया जाता है।

अक्तूबर की बैठक में प्रस्तावित नए बदलाव क्या हैं?
प्रस्तावित जीएसटी 2.0 सुधारों के तहत टैक्स अधिकारियों की सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति को समाप्त करने की योजना है।

न्यायिक अनुमति अनिवार्य: नए ढांचे के तहत किसी भी करदाता की गिरफ्तारी के लिए पहले अदालत से न्यायिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
कंपाउंडिंग और पेनल्टी पर जोर: जीएसटी अधिकारियों का मुख्य ध्यान कर चोरी की राशि, ब्याज और वित्तीय जुर्माना वसूलने पर होगा।

इस सुधार से उद्योग और व्यापार जगत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अधिकारियों द्वारा अचानक की जाने वाली गिरफ्तारी और उत्पीड़न के डर से मुक्ति मिलेगी। गिरफ्तारी केवल अदालत में सुनवाई और अनुमति के बाद ही संभव हो सकेगी। दूसरी ओर, कर अधिकारियों की भूमिका मुख्य रूप से कर वसूली तक सीमित होगी, जबकि गंभीर अपराधों में गिरफ्तारी का काम कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अदालती प्रक्रिया के माध्यम से होगा।

जीएसटी फर्जीवाड़े और गिरफ्तारियों के आंकड़े क्या बताते हैं?
हाल के वर्षों में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और फर्जी पंजीकरण के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है:

वित्त वर्ष 2025-26: सेंट्रल जीएसटी विंग ने 74,782 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी का पता लगाया और 358 लोगों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा, फर्जी और आधार कार्ड के दुरुपयोग से किए गए गलत रजिस्ट्रेशन मामलों में 60 लोग गिरफ्तार किए गए। हाल ही में फिनो पेमेंट्स बैंक के तत्कालीन एमडी एवं सीईओ ऋषि गुप्ता को ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े अवैध धन को शेल कंपनियों के जरिए घुमाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

वित्त वर्ष 2024-25: 58,773 करोड़ रुपये के आईटीसी घोटाले में 178 लोगों को और फर्जी पंजीकरण मामले में 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
वित्त वर्ष 2023-24: 36,373 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में 182 गिरफ्तारियां और फर्जी रजिस्ट्रेशन में 67 गिरफ्तारियां हुई थीं।
7 अक्तूबर को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक देश में कर सुधारों की दिशा तय करेगी। इंस्पेक्टर राज के डर को कम कर न्यायिक निगरानी और डेटा-संचालित कर वसूली को बढ़ावा देने से कारोबारियों को सुगम माहौल मिलेगा, वहीं गंभीर धोखाधड़ी पर कानूनी शिकंजा भी बना रहेगा।

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