केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारतीय किसानों के पास मौजूद कृषि अवशेष और बायोमास भविष्य की बड़ी ताकत बन सकते हैं। उन्होंने सड़कों के निर्माण में “बायोबिटुमेन” के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की बात कही। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण को भी फायदा
नई दिल्ली में इंडस एक्सपोजियम और इंडियन बायोगैस एसोसिएशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय “बायोएनर्जी, बायोफ्यूल और बायोमैटेरियल (BBB)” कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में बायोफ्यूल, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और बायोमास आधारित ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से बढ़ाने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि भारत हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का खर्च पेट्रोलियम और अन्य जीवाश्म ईंधन के आयात पर करता है। ऐसे में देश को सस्ती, स्वदेशी और टिकाऊ ऊर्जा के विकल्पों पर तेजी से काम करना होगा।

बायोबिटुमेन के इस्तेमाल पर जोर
गडकरी ने कहा कि भारतीय किसानों के पास मौजूद कृषि अवशेष और बायोमास भविष्य की बड़ी ताकत बन सकते हैं। उन्होंने सड़कों के निर्माण में “बायोबिटुमेन” के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की बात कही। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
ईथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देते हुए गडकरी ने बताया कि वह खुद 100 प्रतिशत ईथेनॉल से चलने वाली टोयोटा कार का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बजाज, टीवीएस और होंडा जैसी बड़ी दोपहिया वाहन कंपनियां जल्द ही ऐसे फ्लेक्स-इंजन वाहन लॉन्च करने की तैयारी में हैं, जो ज्यादा ईथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि फिलहाल देशभर में लगभग 4,000 परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें बायोमास और कृषि अवशेषों से बायोगैस तैयार की जाएगी। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ किसानों को अतिरिक्त आमदनी का मौका मिलेगा।
इस कार्यक्रम में टेरी (TERI) की महानिदेशक विभा आनंद ने कहा कि भारत ऊर्जा के मामले में अभी भी काफी हद तक आयातित ईंधन पर निर्भर है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा आयात पर ज्यादा निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि बायोएनर्जी परियोजनाओं को बढ़ाने से पहले वैज्ञानिक अध्ययन और शोध बेहद जरूरी है। बायोगैस उत्पादन पूरी तरह बायोमास पर निर्भर करता है, इसलिए पहले यह समझना होगा कि पर्याप्त मात्रा में बायोमास उपलब्ध है या नहीं और परियोजनाएं आर्थिक रूप से कितनी व्यवहारिक हैं।
विभा आनंद ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार और रिसर्च को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को मिशन मोड में शोध करने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों पर भरोसा बढ़ाया जाए और रिसर्च को मजबूत समर्थन दिया जाए, ताकि देश स्वदेशी तकनीक के जरिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

