FMCG कंपनियां वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही से एक बार फिर कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच इनका इनपुट कॉस्ट बढ़ता जा रहा है. ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से आर्थिक दबाव भी बढ़ने लगा है और महंगाई अपना असर दिखाने लगा है. अगर स्थिति यही रही, तो कुछ ही दिनों में साबुन से लेकर सोडा और खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले तेल के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी हो जाएंगी. इससे आम लोगों का गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा. फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियां वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही से एक बार फिर कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं.
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी और रुपये के कमजोर होने से इनपुट कॉस्ट बढ़ता जा रहा है. इससे अब कीमतें स्थिर रखना कंपनियों के लिए मुश्किल भरा साबिज हो रहा है. ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर कच्चे माल की मौजूदा महंगाई बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कीमतें कम से कम 3 से 4 परसेंट तक बढ़ जाएंगी.

हालांकि, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में इसका असर मौजूदा स्टॉक के स्तरों के कारण सीमित रहने की उम्मीद है, लेकिन जैसे-जैसे ये स्टॉक खत्म हो रहे हैं, इंडस्ट्री बदलाव के लिए तैयारी कर रही है. नुवामा की रिपोर्ट में कहा गया है, “हमारी राय में कंपनियाँ आम तौर पर 30-45 दिनों का कच्चा माल और तैयार माल अपने पास रखती हैं इसलिए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है.”
आपको बता दें कि लगभग हर FMCG कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स (साबुन, बिस्किट, शैम्पू) की पैकेजिंग प्लास्टिक से करती है, जो तेल से बनता है. अब पैकेजिंग में ज्यादा खर्च आएगा, तो कंपनियां भी अपने उत्पाद महंगे दामों में बेचेंगी. इसके अलावा, क्रूड ऑयल महंगा होने से लॉजिस्टिक्स पर खर्च अधिक आ रहा है. कंटेनरों के किराए से लेकर जहाजों का इंश्योरेंस तक महंगा हो गया है. भारत सिर्फ क्रूड ही नहीं एडिबल ऑयल का भी एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से दूसरे देशों से मंगाता है. सप्लाई चेन टूटेगी, तो खाना पकाने वाला तेल भी अपने आप महंगा हो जाएगा.


