महाकुंभ में CM योगी ने दिया एकता का संदेश, कहा- सनातन धर्म एक विराट वट वृक्ष की तरह

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को महाकुंभ मेले में हिस्सा लिया और इस आयोजन को एकता का संदेश देने वाला और देश-दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म एक विशाल वट वृक्ष की तरह है और इसकी तुलना किसी छोटे झाड़ से नहीं की जा सकती। प्रयागराज में आयोजित अखिल भारतीय अवधूत भेष बारह पंथ-योगी महासभा के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह बातें कहीं।

सनातन धर्म ही एकमात्र सही धर्म
योगी ने कहा, “दुनिया में कई धर्म और उपासना विधियां हो सकती हैं, लेकिन सनातन धर्म ही एकमात्र सही धर्म है, जो मानवता का धर्म है। भारत में जितनी भी उपासना विधियां हैं, वे भले ही अलग-अलग पंथों से जुड़ी हों, लेकिन सबकी आस्था और निष्ठा सनातन धर्म से ही जुड़ी है। इसका उद्देश्य एक ही है।”

एकता से ही देश अखंड रहेगा
मुख्यमंत्री ने महाकुंभ के महत्व को बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था, “महाकुंभ का संदेश यह है कि एकता से ही देश अखंड रहेगा।” योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि भारत की सुरक्षा से जुड़ा हर पंथ और संप्रदाय एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़ा है, और किसी भी संकट से निपटने के लिए हम सबको एकता का संदेश देना होगा। उन्होंने आगे कहा, “भारत सुरक्षित है तो हम सभी सुरक्षित हैं। अगर भारत पर संकट आता है तो वह सभी धर्मों और पंथों पर आएगा, इसलिए हमें एकजुट रहना होगा।”

सीएम योगी ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया 
योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर पवित्र त्रिवेणी संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति के अवसर पर डुबकी लगाने आए लाखों श्रद्धालुओं का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि महाकुंभ में पिछले 10 दिनों में 10 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं, और अगले 35 दिनों में यह संख्या 45 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।  मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि हमें देश की एकता और समाज की एकता को किसी भी हालत में खंडित नहीं होने देना है।

भाषा के नाम पर हमें बांटने की हो रही कोशिश
उन्होंने कहा, “कुछ लोग हमें बांटना चाहते हैं, भाषा के नाम पर हमें बांटने की कोशिश कर रहे हैं। हमें उन लोगों के षड्यंत्र से बचना होगा और संतों को नकारात्मकता से दूर रखना होगा।” इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न तीर्थ स्थलों से आए महंतों और आचार्यों को सम्मानित किया। उन्होंने जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, परमात्मानंद महाराज, निर्मलानंद महाराज समेत कई अन्य संतों को शॉल ओढ़ाकर और गोरखनाथ जी की प्रतिमा भेंट कर उनका स्वागत किया।

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