राज्यसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा हुई. इस दौरान स्वाति मालीवाल ने राजधानी की प्रदूषित हवा को लेकर तीखी चिंता जताई. देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर राज्यसभा में जोरदार बहस देखने को मिली. जहां आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल ने दिल्ली की खराब हवा को गंभीर सार्वजनिक संकट बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल और सख्त कदम उठाने की मांग की. उन्होंने कहा कि यह समस्या अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा मामला बन चुकी है.

राज्यसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान स्वाति मालीवाल ने राजधानी की प्रदूषित हवा को लेकर तीखी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए लगातार खराब होती हवा किसी सजा से कम नहीं है. मालीवाल के मुताबिक सरकार को इस संकट को रोकने के लिए आपात स्तर पर कदम उठाने चाहिए.
बहस के दौरान मालीवाल ने सुझाव दिया कि जब तक प्रदूषण पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो जाता, तब तक एयर प्यूरीफायर और वॉटर प्यूरीफायर जैसे उपकरणों को जीएसटी से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए. उनका कहना था कि इन उपकरणों की जरूरत आज कई परिवारों के लिए अनिवार्य बन चुकी है, इसलिए सरकार को इन्हें सस्ता बनाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए. मालीवाल ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CQAM) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आयोग को नौकरशाही के दबाव से बाहर निकालकर पूरी तरह स्वायत्त बनाया जाना चाहिए. उनके अनुसार इस संस्था का नेतृत्व अनुभवी विशेषज्ञों के हाथ में होना चाहिए और उसे पर्याप्त अधिकार तथा संसाधन दिए जाने जरूरी हैं.

राज्यसभा सांसद ने दिल्ली में प्रदूषण से स्थायी लड़ाई के लिए एक बड़े वित्तीय पैकेज की भी मांग की. उन्होंने कहा कि राजधानी की हवा को साफ करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाया जाना चाहिए. इस फंड का इस्तेमाल साफ लक्ष्य के साथ प्रदूषण के स्रोतों को खत्म करने में किया जाना चाहिए. मालीवाल ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि भारत की राजधानी को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ तक लोगों को सलाह दे रहे हैं कि यदि संभव हो तो कुछ समय के लिए दिल्ली छोड़ दें, क्योंकि यहां की हवा लगातार खतरनाक स्तर पर बनी हुई है.
उन्होंने सदन में कुछ गंभीर आंकड़े भी साझा किए. मालीवाल के अनुसार वर्ष 2023 में दिल्ली में हुई कुल मौतों में लगभग 15 प्रतिशत मामलों का संबंध सीधे तौर पर वायु प्रदूषण से था. इसके अलावा करीब 22 लाख बच्चों के फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई है. उनका यह भी कहना था कि वर्ष 2025 में दिल्ली में ऐसा एक भी दिन नहीं रहा जब हवा की गुणवत्ता ‘अच्छी’ श्रेणी में दर्ज की गई हो. मालीवाल ने प्रदूषण की गंभीरता को समझाने के लिए कहा कि दिल्ली में एक दिन सांस लेना लगभग 50 सिगरेट पीने के बराबर है. उनके मुताबिक यह स्थिति केवल स्वास्थ्य आपातकाल नहीं बल्कि दिल्लीवासियों के खिलाफ लगातार जारी एक अपराध के समान है. उन्होंने इस संकट के समाधान में पिछली सरकारों की नाकामी को भी जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने 2015 से 2023 के बीच हरित उपकर के जरिए करीब 1500 करोड़ रुपये जुटाए थे, लेकिन इसका आधे से भी कम हिस्सा खर्च किया गया. मालीवाल ने कहा कि कई बार यह खर्च अदालतों के हस्तक्षेप के बाद ही किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदूषण से लड़ने के नाम पर नेताओं की तस्वीरों वाले होर्डिंग लगाए गए. मालीवाल ने पराली जलाने की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों को अक्सर मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है क्योंकि उनके पास वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती. उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को प्रति एकड़ 5 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए ताकि वे पराली प्रबंधन के बेहतर विकल्प अपना सकें और हर साल होने वाला दोषारोपण का सिलसिला खत्म हो सके.


