NATIOANL : श्रीनगर से BSc, बेंगलुरु से किया MBA, फिर सज्‍जाद गुल कैसे बना TRF का कुख्‍यात कमांडर

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भारत का मिनी स्विट्जरलैंड पहलगाम की बैसरन घाटी खून से लाल हो गई. जहां की फिजां में हंसी-खुशी घुली थी, आतंकवादियों की करततू की वजह से वहां अब मातमी सन्‍नाटा पसरा हुआ है.

 

जम्‍मू-कश्‍मीर को धरती स्‍वर्ग कहा जाता है. पहलगाम की बैसरन घाटी इस स्‍वर्ग की राजधानी से कम नहीं, जहां जाने के लिए हर भारतीय का दिल मचलता है, पर अब शायद ऐसा न हो. पहलगाम की इसी बैसरन घाटी में आतंकवादियों ने 26 निहत्‍थे लोगों को गोलियों से भून डाला. इस तरह पर्यटकों से आबाद और खुशहाल रहने वाली बैसरन घाटी रक्‍तरंजित हो गई. मासूमों के नरसंहार की निर्ममता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकांश के सिर में गोली मारी गई. इस घटना से जम्‍मू-कश्‍मीर के साथ ही पूरा भारतवर्ष स्‍तब्‍ध रह गया. बताया जा रहा है कि इस घटना को लश्‍कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन TRF यानी द रेजिस्‍टेंस फोर्स के आतंकवादियों ने अंजाम दिया. TRF का नेतृत्‍व तीन कुख्‍यात आतंकवादी कर रहे हैं- साजिद जट, शेख सज्‍जाद गुल और सलीम रहमानी. शेख सज्‍जाद गुल TRF का कमांडर बताया जाता है. इसे 23 साल पहले गिरफ्तार किया गया था. सज्‍जाद गुल को दिल्‍ली की तिहाड़ जेल में रखा गया था.

TRF का कमांडर सज्‍जाद गुल तिहाड़ जेल में ही लश्‍कर आतंकियों में संपर्क में आया था. सज्‍जाद को हवाला के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. लश्‍कर पर प्रतिबंध लगने के बाद TRF बनाया गया था, ताकि दुनिया के नजरों से उसे छुपाया जा सके. साल 1974 में पैदा हुए सज्‍जाद गुल की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई घाटी में ही हुई. उसने श्रीनगर से BSc किया था. आगे की पढ़ाई के लिए वह बेंगलुरु गया और वहां से MBA की पढ़ाई की. सज्‍जाद गुल ने साल 1996 में एमबीए की डिग्री ली थी. इसके बाद उसके कदम राष्‍ट्रविरोधी गतिविधियों की ओर बढ़ गए. वह लगातार देशविरोधी गतिविधियों में शामिल रहने लगा था. आज के दिन वह घाटी के कुख्‍यात आतंकवादियों में से एक बन चुका है, जिसकी तलाश सुरक्षा एजेंसियों को है. बता दें कि TRF को यूएपीए की सख्‍त धाराओं के तहत प्रतिबंध‍ित किया गया है.

‘इकोनॉमिक टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के अनुसार, सज्‍जाद गुल को हवाला के एक मामले में साल 2002 में गिरफ्तार किया गया था. उसे दिल्‍ली की तिहाड़ जेल में रखा गया था, जहां से वह लश्‍कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के कॉन्‍टैक्‍ट में आया था. साल 2005 में सज्‍जाद को दिल्‍ली से श्रीनगर के सेंट्रल जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था, जहां से उसे अगले साल यानी साल 2006 में छोड़ दिया गया था. सज्‍जाद गुल उर्फ हमजा को साल 2016 तक वॉच लिस्‍ट में रखा गया था. जेल से छूटने के बाद सज्‍जाद गुल पूरी तरह से आतंकी गतिविधियों में संलिप्‍त हो गया उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

सज्‍जाद गुल के कारनामों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एनआईए ने उसके सिर पर 10 रुपये का इनाम रखा है. सज्‍जाद गुल ने साल 2017 में फेक पासपोर्ट हासिल किया था. बताया जाता है कि इसके बाद वह सीमापार जाकर लश्‍कर के समर्थन वाले TRF के लिए पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले कश्‍मीर बेस बनाया और यहीं से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने लगा. एनआईए की जांच में पता चला है कि सज्‍जाद गुल लश्‍कर आतंकियों के साथ मिलकर घाटी के युवाओं को बरगलाने लगा और बाहर के लोगों के साथ ही सुरक्षाकर्मियों पर हमले के लिए उन्‍हें उकसाने का काम शुरू कर दिया. सज्‍जाद गुल की मदद करने वाले कई युवाओं को यूएपीए के प्रावधानों के तहत आतंकवादी घोषित किया गया है.

 

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