ENTERTAINMENT : दिलजीत दोसांझ ने अमिताभ बच्चन के पैर छूकर कर दी गलती! भड़का खालिस्तानी गैंग, दी धमकी

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आतंकी संगठन के मुताबिक, अमिताभ बच्चन वो बॉलीवुड एक्टर हैं, जिन्होंने 31 अक्टूबर 1984 को ‘खून का बदला खून के नारे के साथ हिंदुस्तानी भीड़ को उकसाया था, जिसके बाद हिंसक दस्तों ने नरसंहार किया. इसमें 30,000 से ज्यादा सिख लोग मारे गए थे. ऐसे में दिलजीत दोसांझ के बिग बी के पैर छूने से ये गैंग भड़क उठा है.

खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) ने पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के 1 नवंबर को ऑस्ट्रेलिया में होने वाले कॉन्सर्ट को बंद करवाने की धमकी दी है. इस दिन को अकाल तख्त साहिब ने ‘सिख नरसंहार स्मरण दिवस’ घोषित किया है. यह कार्रवाई दिलजीत दोसांझ के अमिताभ बच्चन के पैर छूने के बाद की गई है. अमिताभ के गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ सीजन 17 में दिलजीत दोसांझ ने शिरकत की थी. शो के प्रोमो में उन्हें बच्चन के पैर छूते और उन्हें गले लगाते देखा गया. ये एपिसोड 31 अक्टूबर को टीवी पर आएगा.

आतंकी संगठन के मुताबिक, अमिताभ बच्चन वो बॉलीवुड एक्टर हैं, जिन्होंने 31 अक्टूबर 1984 को ‘खून का बदला खून के नारे के साथ हिंदुस्तानी भीड़ को उकसाया था, जिसके बाद हिंसक दस्तों ने नरसंहार किया. इसमें भारतभर में 30,000 से अधिक सिख पुरुष, महिलाएं और बच्चे मारे गए थे.

SFJ के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कहा, ‘अमिताभ बच्चन, जिनके शब्दों ने नरसंहार को उकसाया, उनके पैर छूकर दिलजीत दोसांझ ने 1984 के सिख नरसंहार के हर पीड़ित, हर विधवा और हर अनाथ का अपमान किया है. यह अज्ञानता नहीं बल्कि विश्वासघात है. जिन सिखों को जिंदा जलाया गया, जिन महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ, जिन बच्चों को काट डाला गया, उनकी राख अभी ठंडी नहीं हुई है. कोई भी सिख, जिसे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनाई दे, 1 नवंबर, स्मरण दिवस पर प्रदर्शन या उत्सव नहीं मना सकता.’

सिख्स फॉर जस्टिस के मुताबिक, 41 सालों से सिखों की हत्या को उकसाने वाले किसी भी भारतीय नेता या सेलिब्रिटी को जवाबदेह नहीं ठहराया गया है. इसके बजाय इन लोगों को पुरस्कृत, सम्मानित और सफेदपोश किया गया है. अब जब दुनिया में इस नरसंहार को याद किया जाता है, तब दिलजीत दोसांझ, जो कि एक ग्लोबल पंजाबी आइकन हैं, इस शोक के महीने को व्यावसायिक बना रहे हैं. अमिताभ बच्चन के नरसंहारकारी आह्वान की छाया में कॉन्सर्ट कर रहे हैं.

SFJ ने औपचारिक रूप से जत्थेदार अकाल तख्त साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज को पत्र लिखकर दिलजीत दोसांझ को 2010 के तख्त फरमान के आलोक में अपने कार्यों की व्याख्या करने के लिए बुलाने का आग्रह किया है. इसमें नवंबर 1984 को ‘सिख नरसंहार माह’ के रूप में मान्यता दी गई थी.

जानकारी के मुताबिक, सिख्स फॉर जस्टिस खालिस्तानी संगठन ने 1 नवंबर 2025 को दिलजीत दोसांझ के ऑस्ट्रेलियाई आयोजन स्थल के बाहर रैली आयोजित करने का प्लान बनाया है. वहीं ये संगठन सभी सिख संस्थानों, कलाकारों और दर्शकों से अपील करता है कि वे नवंबर 1984 के सिख नरसंहार के प्रचार या सफेदपोशी से जुड़े व्यक्तियों के साथ किसी भी आयोजन या सहयोग का बहिष्कार करें.

संगठन का कहना है कि 10 जुलाई 2010 को अकाल तख्त साहिब ने घोषणा की थी कि 1984 की हत्याएं दंगे नहीं, बल्कि सिखों को खत्म करने के लिए किया गया नरसंहार था. पांच उच्च पुजारियों ने निर्देश दिया कि 1 नवंबर को प्रतिवर्ष ‘नरसंहार स्मरण दिवस’ के रूप में मनाया जाए. इसके बावजूद दिलजीत दोसांझ ने अमिताभ बच्चन को सम्मानित किया, जिनपर हिंदुस्तानी भीड़ को सिखों का खून बहाने के लिए उकसाने का आरोप है. साथ ही उन्होंने पवित्र स्मरण अवधि के दौरान कॉन्सर्ट करने का फैसला किया.

उन्होंने ये भी कहा, ‘हम कभी भी हत्यारों के प्रतीकों को पीड़ितों की स्मृति के साथ एक ही मंच साझा करने की अनुमति नहीं देंगे. SFJ इस मजाक को बंद कर देगा, क्योंकि स्मृति बिकाऊ नहीं है और नरसंहार को तालियों के लिए सामान्य नहीं किया जा सकता.’

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