हीरानगर आईबी सेक्टर में चंदवान सीमा चौकी की जीरो लाइन के साथ चक चंगा गांव में बाड़ के पार पकी हुई गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो गई. किसानों के लिए यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है.

कठुआ जिले के हीरानगर आईबी सेक्टर में चंदवान सीमा चौकी के पास चक चंगा गांव की जीरो लाइन पर इस सीजन की गेहूं की बंपर फसल की कटाई शुरू हो गई है. यह पहल जिला प्रशासन, कृषि विभाग और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के आपसी समन्वय से संभव हो पाई है.
इस कटाई अभियान की शुरुआत मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय गुप्ता और बीएसएफ के कंपनी कमांडेंट इंस्पेक्टर महेश कुमार ने की. डिप्टी कमिश्नर डॉ. राकेश मिन्हास के नेतृत्व में किसानों को बाड़ के पार सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से खेती करने की अनुमति मिली, जिससे उन्हें रिकॉर्ड पैदावार प्राप्त हुई.सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों के लिए यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जो इस मौसम में गेहूं की बंपर फसल का जश्न मना रहे हैं. किसानों ने सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यक रसद सहायता प्रदान करने में उनके अटूट सहयोग के लिए जिला प्रशासन, कृषि विभाग और बीएसएफ का आभार व्यक्त किया.
रबी 2024-25 सीजन के दौरान बाड़ के पार 350 एकड़ जमीन पर गेहूं की खेती की गई थी. कटाई को तेज़ी से पूरा करने के लिए कृषि विभाग ने 15 ट्रैक्टर और 2 कंबाइन हार्वेस्टर तैनात किए हैं. यह पहल वर्ष 2021-22 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई थी, जो अब व्यापक रूप ले चुकी है. अब इसमें चक चंगा, चक टांडा, क्रोल कृष्णा, करोल मैथ्रैन और मनियारी जैसे गांवों के लगभग 90 किसान भाग ले रहे हैं.
इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय गुप्ता ने कहा, “हमारे लगातार प्रयासों, तकनीकी सहायता और बीएसएफ के सुरक्षा समर्थन के परिणामस्वरूप इस वर्ष सफल फसल हुई है. हम सीमावर्ती किसानों को सशक्त बनाने और उन्हें टिकाऊ कृषि के लिए आवश्यक संसाधन प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
अगले 2-3 दिनों में कटाई का काम पूरा हो जाएगा.” स्थानीय किसान राम राज ने अपनी उपलब्धि साझा करते हुए कहा, “इस सीजन में मैंने 12 एकड़ खेती की जमीन से 240 क्विंटल गेहूं की शानदार फसल ली है. कृषि विभाग, खास तौर पर सीएओ कठुआ ने बुवाई से लेकर कटाई तक हमारा मार्गदर्शन और सहयोग किया है.”
कृषि विभाग के अनुसार, अगले 2-3 दिनों में कटाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा. यह उपलब्धि न केवल सीमावर्ती किसानों के लिए गर्व की बात है, बल्कि कठुआ जिले के कृषि क्षेत्र के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हो रही है.


