HEALTH : बच्चे को बनाना है जीनियस, तो पैदा होने से लेकर तीन साल तक बिल्कुल न खिलाएं ये चीज

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बच्चों की सेहत को लेकर हमें शुरुआत से काफी ध्यान देने की जरूरत होती है. अगर हम शुरुआत में इन चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो ये चीजें हमें आगे चलकर काफी भारी पड़ती हैं.

बचपन में हमें बच्चों को लेकर तमाम चीजों पर ध्यान देने की जरूरत होती है. अगर हम इन बातों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो उनकी सेहत पर इसका काफी असर पड़ता है. इन्हीं चीजों में एक यह है कि वे बचपन में क्या खाते-पीते हैं. हमें एक पैरेंट होने के नाते इन बातों पर काफी ध्यान देने की जरूरत होती है. यूके की एक स्टडी में यह निकल कर आया है कि प्रेग्नेंसी और बचपन में अगर चीनी का कम यूज किया जाए, तो यह हमें बाद में चलकर काफी फायदा देता है. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

इस रिसर्च में हैरान कर देने वाले आंकड़े निकल कर सामने आए. दरअसल, रिसर्चर ने जब 1950 के दशक की शुरुआत में ब्रिटेन में चीनी राशनिंग के दौर में रह रही मांओं से जन्में बच्चों को स्टडी किया, तो मिला कि उस समय प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को 40 ग्राम से कम चीनी खाने को मिलती थी और जिन बच्चों की उम्र दो साल से कम होती थी, उन्हें कोई चीनी खाने को नहीं मिलती थी. उनकी सेहत पर पैनी नजर रखकर रिसर्चर को यह मिला कि शुरुआत में कम चीनी खाने के चलते उनकी सेहत में हार्ट की बीमारी के जोखिम काफी कम थे. साइंटिस्ट को मिला कि जिनके बचपन में चीनी का सेवन सीमित था, उनकी हार्ट हेल्थ बेहतर रही. नतीजों में यह भी सामने आया कि ऐसे लोगों में हृदय रोग का खतरा 20 फीसदी कम, दिल का दौरा पड़ने की संभावना 25 फीसदी कम, हृदय गति रुकने का जोखिम 26 फीसदी कम, और स्ट्रोक का खतरा 31 फीसदी कम पाया गया.

अगर बात करें कि चीनी का कम सेवन कैसे आपके बच्चे को चैंपियन बना सकता है, तो यह कुछ ऐसे है कि चीनी का सेवन कम करने से न केवल शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा घटता है, बल्कि यह दिल को भी अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षित रखता है. ये दोनों बीमारियां अक्सर हार्ट डिजीज के पीछे की मुख्य वजह मानी जाती हैं.

रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन किसी पक्के कारण और प्रभाव का सबूत तो नहीं देता, लेकिन इसके नतीजे साफ तौर पर दिखाते हैं कि अगर प्रेग्नेंसी और बचपन के शुरुआती सालों में चीनी की मात्रा सीमित रखी जाए, तो इसका असर लंबे समय तक सेहत पर पॉजिटिव असर देखने को मिलता है. हालांकि इन निष्कर्षों को पूरी तरह साबित करने के लिए और शोध की जरूरत है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रिसर्च सबूत देता है कि जीवन के शुरुआती दौर में सही पोषण आगे चलकर बेहतर हृदय स्वास्थ्य की नींव रखता है.

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं.

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

बच्चे को बनाना है जीनियस, तो पैदा होने से लेकर तीन साल तक बिल्कुल न खिलाएं ये चीज

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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