Health : आपके लिवर को भी ‘पत्थर’ बना रही डायबिटीज, हर 4 में से एक मरीज को है फाइब्रोसिस का खतरा

0
20

डायबिटीज अब सिर्फ आंख, किडनी और नसों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लीवर की बीमारी को भी इसकी चौथी बड़ी दिक्कत के रूप में देखा जाना चाहिए. चलिए बताते हैं. भारत में डायबिटीज को अब सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी मानना गलत साबित हो रहा है. 2026 की एक मल्टीसेंटर स्टडी, DiaFib-Liver Study ने इस धारणा को चुनौती दी है. स्टडी में सामने आया कि देश में टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हर चार में से एक एडल्ट में लीवर फाइब्रोसिस यानी लीवर पर गंभीर स्कारिंग मौजूद है. इतना ही नहीं, हर 20 में से एक मरीज में सिरोसिस का खतरा भी पाया गया है.

यह स्टडी बताती है कि डायबिटीज अब सिर्फ आंख, किडनी और नसों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लीवर की बीमारी को भी इसकी चौथी बड़ी दिक्कत के रूप में देखा जाना चाहिए. रिसर्च में खासतौर पर मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज पर फोकस किया गया है, जिसे पहले फैटी लिवर के नाम से जाना जाता था. MASLD की समस्या तब शुरू होती है जब शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और अतिरिक्त फैट लीवर में जमा होने लगता है. धीरे-धीरे यही फैट सूजन पैदा करता है और आगे चलकर फाइब्रोसिस का रूप ले लेता है, जिसमें लीवर के स्वस्थ टिश्यू की जगह स्कार टिश्यू बनने लगता है.

डॉ. कपिल शर्मा ने TOI को बताया कि टाइप-2 डायबिटीज में शरीर में फैट और ग्लूकोज का असंतुलन लीवर को भी प्रभावित करता है. आंकड़ों के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों के लीवर में फैट जमा हो जाता है, जो समय के साथ सूजन और फाइब्रोसिस में बदल सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि इस बीमारी के कई रिस्क फैक्टर हैं, जैसे मोटापा, खराब शुगर कंट्रोल, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और मेटाबोलिक सिंड्रोम. खास बात यह है कि कई मामलों में लीवर की बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है.

रिसर्च में यह भी जोर दिया गया है कि सिर्फ फैट जमा होना उतना खतरनाक नहीं होता, जितना कि फाइब्रोसिस. क्योंकि फाइब्रोसिस यह संकेत देता है कि बीमारी गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है और आगे चलकर सिरोसिस, लीवर फेलियर और यहां तक कि मौत का जोखिम भी बढ़ सकता है. इसीलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि डायबिटीज मरीजों में सिर्फ फैटी लिवर की जांच ही नहीं, बल्कि फाइब्रोसिस की पहचान पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए. इसके लिए नियमित जांच जैसे लिवर एंजाइम टेस्ट और फाइब्रोस्कैन कराना जरूरी है, ताकि बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सके.

बचाव के लिए डॉक्टर वजन नियंत्रित रखने, संतुलित आहार लेने, नियमित एक्सरसाइज करने और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट व शराब से दूरी बनाने की सलाह देते हैं. इसके साथ ही, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना भी जरूरी है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here