तृतीय अतिरिक्त सेशंस जज जम्मू मदन लाल ने जैश-ए-मोहम्मद के कथित आतंकी उबेद-उल-इस्लाम के जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।

पुलिस केस के अनुसार 12 सितम्बर 2019 को आरोपी जब अपने सहयोगियों के साथ वाहन में पुलिस नाका लखनपुर पर पहुंचा तो वाहन को जांच के लिए रोका गया। जांच के दौरान वाहन से काले रंग का बैग बरामद हुआ जिसे ट्रक ड्राइवर की सीट के पीछे छिपाया हुआ था। बैग से 4 ए.के.-56 राइफल, 2 ए.के.-47 राइफल, 6 मैगजीन और 180 राऊंड बरामद किए गए थे।
आरोपियों ने ये हथियार आतंकी आशिक अहमद नेंगरू के निर्देश पर तय स्थान से उठाए थे जो कश्मीर वादी में सक्रिय जैश-ए-मोहम्म्द आतंकियों को सौंपे जाने थे ताकि भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ा जा सके। पुलिस की ओर से दायर चार्जशीट में बताया गया कि आरोपी जैश आतंकी आशिक अहमद नेंगरू की ओर से बनाए गए षड्यंत्र के तहत जम्मू-कश्मीर में आपसी भाईचारे को समाप्त कर शांति को भंग करना था।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि ट्रायल में देरी को आधार बनाकर इस गंभीर अपराध को जमानत के लिए आधार नहीं बनाया जा सकता। आरोपियों को यू.ए (पी) अधिनियम के तहत स्पैशल कोर्ट की ओर से प्रदान की गई जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।


