समोसा किसे पसंद नहीं होता, लोग अक्सर समोसे के साथ चटनी या सब्जी खाते हैं. लेकिन, समोसे के साथ कढ़ी आपने शायद ही कहीं सुना हो. यह स्वाद मिलता है झांसी के मानिक चौक में. इस स्वाद की शुरुआत की थी लज्जाराम ने. 65 साल पहले शुरू हुई इस दुकान की दीवानगी आज भी लोगों में बनी हुई है. सुबह 7 बजते ही दुकान पर समोसा और कढ़ी का स्वाद चखने वालों की लंबी लाइन लग जाती है.

आज लज्जाराम के बेटे प्रमोद कुमार इस दुकान को चलाते हैं. उन्होंने बताया कि ‘एक बार हमारे पिता लज्जाराम हाथरस गए थे. वहां उन्होंने एक समोसा खाया, दुकानदार ने उस पर सब्जी जैसा कुछ डाला था. यह डिश उन्हें पसंद नहीं आई. घर वापस आने के बाद उन्होंने समोसे के साथ कढ़ी सर्व करने के बारे में सोचा. उन्होंने पहले घर में पकाया-बनाया.
सबने खाया और डिश की तारीफ की. इसके बाद, उन्होंने खोया मंडी में दुकान खोल दी. यहीं से इस डिश की शुरुआत हुई. लोगों को ये डिश पसंद आने लगी. दुकान पर भीड़ लगने लगी. जितना भी माल बनाते, कुछ घंटों में ही बिक जाता. आज उनकी दुकान देखकर झांसी में 200 से अधिक दुकानें खुल गई हैं लेकिन, यह स्वाद किसी के पास नहीं है.’
प्रमोद कुमार ने बताया कि यह दुकान सुबह 9 बजे खुल जाती है और 12 बजे तक बंद हो जाती है. 4 घंटे में यहां लोग 50 लीटर कढ़ी चट कर जाते हैं. समोसे जितने भी बनते हैं, सब बिक जाते हैं. खास बात यह है कि यहां सिर्फ समोसे की कीमत 15 रुपए लेते हैं. कढ़ी पूरी तरह से फ्री होती है, जितना चाहे मांगकर पी सकते हैं।.
प्रमोद ने बताया कि ‘कढ़ी बेहद खास होती है. बेसन और छाछ के साथ जो भी मसाले इसमें पड़ते हैं, वह सभी हम खुद घर पर ही तैयार कराते हैं. जो हींग हम कढ़ी में इस्तेमाल करते हैं, वो 36 हजार रुपए किलो के भाव की होती है. इसलिए, हमारा टेस्ट सबसे अलग होता है.’


