हिमाचल प्रदेश में हाल ही में न्यूनतम बस किराए में हुई दोगुनी बढ़ोतरी के बाद अब स्वास्थ्य सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं. सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों को इलाज से पहले पर्ची बनवाने के लिए 10 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं. ये प्रस्ताव रोगी कल्याण समिति की ओर से आया है, जिसकी पुष्टि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने आज (7 अप्रैल) की है.

शांडिल ने शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि सरकार ने अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन वह स्वयं इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं. उनका तर्क है कि पीजीआई जैसे बड़े संस्थानों में भी पर्ची के लिए शुल्क लिया जाता है, ऐसे में हिमाचल में भी यह व्यवस्था लागू की जा सकती है. गौरतलब है कि फिलहाल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पर्ची बनवाने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता.
सूत्रों के अनुसार, सरकार अब अस्पतालों में दी जाने वाली निशुल्क जांच सेवाओं पर भी शुल्क लगाने की योजना पर विचार कर रही है. हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं आया है. स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि यदि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवानी हैं, तो कुछ कठिन निर्णय लेने ही होंगे.
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार इस समय करीब एक लाख करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ तले है. मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य को वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कुछ सख्त कदम उठाने होंगे. लेकिन दूसरी ओर, जब आम जनता पर आर्थिक भार डाला जा रहा है, उसी समय विधायकों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी से जनता में असंतोष भी देखा जा रहा है.

