अंतर्राष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए देवी-देवताओं को भेजे जाने वाले निमंत्रण पत्र में मंडी नगर की ठेठ मंडयाली बोली लिखी गई है। निमंत्रण पत्र के लिए इसमें 250 जीएसएम का पेपर व लिफिंग तकनीक इस्तेमाल की गई है। सोमवार को 16वीं से लेकर 18वीं शताब्दी तक प्रचलित मंडी कलम शैली के अनुरूप आर्ट वर्क के साथ प्रकाशित निमंत्रण पत्र डीसी एवं अध्यक्ष शिवरात्रि मेला कमेटी अपूर्व देवगन ने सोमवार को लाॅन्च किया।

शिवरात्रि मेला कमेटी मंडी राजदेवता माधोराय की ओर से 216 देवी-देवताओं को न्यूंदरा देने जा रही है। निमंत्रण पत्र तैयार करने में मंडी कलम को पुनर्जीवित करने वाले प्रसिद्ध चित्रकार राजेश कुमार, जिला विकास अधिकारी गोपी चंद पाठक, सहायक उपायुक्त कुलदीप सिंह पटियाल, डीसी कार्यालय के विजय, राजेश और सुरेश, वरिष्ठ नागरिक विनोद बहल, अनिल शर्मा और जगदीश कपूर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस मौके पर एडीसी रोहित राठौर, संयोजक देवता उपसमिति शिवरात्रि मेला, एडीएम मंडी डाॅ. मदन कुमार, जिला राजस्व अधिकारी मंडी हरीश शर्मा, जिला विकास अधिकारी गोपी चंद पाठक व चित्रकार राजेश कुमार उपस्थित रहे।
ये लिखा है निमंत्रण पत्र में
अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए तैयार निमंत्रण पत्र कुछ इस तरह से लिखा गया है, एस्स साल 15 फागण सम्मत 2081 से 22 फागण 2081 (25 फरवरी 2025 से 5 मार्च 2025) तका मंडी सैहरा अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मनाणा लाईरा। तुस्सा सभी के हाथ जोड़ी के अरज हई कि मेले मंझा पुराणे रीति रवाजानुसार आईके सोभा बधाणी होर तुस्सा रे दरसन कठ्ठे आईरे सभी जातरूआं जो आपणा आसीरवाद देणा। श्री 108 माधोराय हरसाल तस्सारे दरसन करीके आसे सभी सुखी रैहें। ऐस्सा साला भी शिवरात्रि मेले मंझा आओणे री किरपा होर आसा सभी परा आपणी किरपा दरिस्टी रखणी।
निमंत्रण पत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का भी चित्रण
निमंत्रण पत्र के चित्रों में भगवान शिव और माता-पार्वती के ब्याह का सादे रंग से चित्रण किया गया है जो सादगी को दर्शाता है और साथ में खड़े देवी-देवता अपनी भागीदारी दिखा रहे हैं। बीच में शिव के वाहन नंदी व पार्वती के वाहन चीता इकट्ठे दिखाए गए हैं जोकि आपस में प्रेम से रहना दर्शाते हैं। बीच के भाग में त्रिलोकीनाथ हृदय में आदि भवानी को बिठाया है जो प्रेम का संदेश दर्शा रहे हैं। सुनहरी लाइन राजसी प्रतीक दिखाई गई है।
क्या कहते हैं डीसी मंडी
डीसी मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए देवी-देवताओं को भेजे जाने वाले निमंत्रण पत्र के माध्यम से राजा सिद्ध सेन के समय 16वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी तक प्रचलित मंडी कलम के प्रारूप और स्वरूप को घर-घर पहुंचाने का प्रयास किया गया है। निमंत्रण पत्र में उस दौर के राजसी ठाठ बाट को दिखाने का प्रयास किया गया है। निमंत्रण पत्र में लाल, हरा, नीला, पीला और सुनहरे रंगों से सजी इसकी कलर थीम मंडी कलम को दर्शाती है।


