ईरान-इजरायल युद्ध से कश्मीर का पर्यटन उद्योग प्रभावित है. महंगे हवाई टिकट और रसोई गैस की कमी से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हजारों किलोमीटर दूर लड़ी जा रही जंग का सीधा और विनाशकारी असर अब कश्मीर घाटी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ‘पर्यटन उद्योग’ पर पड़ रहा है.
मार्च महीने में बसंत ऋतु की शुरुआत के साथ ही कश्मीर में पर्यटकों का सैलाब उमड़ने लगता है, लेकिन इस साल हालात बिल्कुल उलट हैं. रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत के कारण जहां होटल और रेस्टोरेंट पहले से ही बंदी की कगार पर थे, वहीं अब एविएशन फ्यूल (Aviation Fuel) पर लगे सरचार्ज ने हवाई टिकटों के दाम आसमान पर पहुंचा दिए हैं. इस दोहरी मार ने पर्यटन सीजन के आगाज से पहले ही घाटी में सन्नाटा पसार दिया है.

हवाई टिकटों की आसमान छूती कीमतों के कारण पर्यटक कश्मीर आने से कतरा रहे हैं. कश्मीर टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटर एसोसिएशन के प्रमुख गुलाम रसूल सियाह के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक सिर्फ 15 प्रतिशत ही बुकिंग हुई है. उन्होंने कहा, “टिकट के दाम काफी बढ़ गए हैं. अगर यही हाल रहा तो जिन लोगों ने टिकट बुक किए हैं, वे भी कैंसिल कर देंगे. होटल-रेस्टोरेंट गैस की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में टूरिस्ट यहाँ आकर करेंगे भी क्या?”
डल झील के प्रसिद्ध हाउसबोट भी वीरान पड़े हैं. हाउसबोट मालिक तारिक अहमद बताते हैं, “पिछले साल इस मौसम में ओवर-बुकिंग थी, लेकिन इस बार तेल के दामों के चलते एयर टिकट महंगे हो गए हैं और हमारे हाउसबोट पूरी तरह खाली हैं.” होटल मालिकों का दर्द: श्रीनगर की एक प्रसिद्ध होटल चेन के मालिक साहिल फारूक का कहना है कि उनके पास गैस का थोड़ा स्टॉक तो है, लेकिन महंगे टिकटों के कारण अगर टूरिस्ट ही नहीं आए, तो उन्हें अपना कामकाज बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा.
किराया बढ़ा, लेकिन सवारियां नदारद: एविएशन फ्यूल के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल के दामों में उछाल के चलते जम्मू-कश्मीर सरकार ने पैसेंजर किराये में 18% की बढ़ोतरी की है. लेकिन टैक्सी चालक इससे खुश नहीं हैं. टैक्सी चालक मोहम्मद अयूब कहते हैं, “टूरिस्ट हैं ही नहीं तो बढ़ी हुई कीमत का हम क्या करेंगे! हम अपनी जेब से 500 रुपये कम लेने को तैयार हैं, बस टूरिस्ट आने चाहिए.”


