अक्सर देखा जाता है कि जैसे-जैसे किसी व्यक्ति की सैलरी बढ़ती है, वैसे-वैसे उसके खर्च भी बढ़ने लगते हैं. ऐसे में कमाई बढ़ने के बावजूद बचत और निवेश में खास फर्क नहीं दिखता. अक्सर देखा जाता है कि जैसे-जैसे किसी व्यक्ति की सैलरी बढ़ती है, वैसे-वैसे उसके खर्च भी बढ़ने लगते हैं. ऐसे में कमाई बढ़ने के बावजूद बचत और निवेश में खास फर्क नहीं दिखता. लोगों की चाहत तो होती है कि वे खुद के लिए कुछ पैसों की बचत करें पर लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण बचत हो नहीं पाती है.
वित्तीय योजना बनाने वाले जानकारों का कहना है कि आय बढ़ने के साथ-साथ बचत और निवेश को भी बढ़ाना उतना ही जरूरी है. वरना बढ़ता खर्च धीरे-धीरे आपकी अतिरिक्त कमाई को खत्म कर देती हैं. इसी स्थिति को आमतौर पर लाइफस्टाइल इंफ्लेशन कहा जाता है. आइए जानते है आखिर इसके कैसे बचा जा सकता है. जब किसी व्यक्ति की कमाई बढ़ती है तो अक्सर उसके साथ खर्च करने की आदत भी बढ़ने लगती है. धीरे-धीरे यह स्थिति ऐसी बन जाती है कि बचाया हुआ पैसा भी एक समय में खर्च हो जाता है.

नई-नई जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसों की जरुरत हमेशा बनी ही रहती है. इसे ही लाइफस्टाइल इंफ्लेशन कहा जाता है. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो सैलरी या इनकम बढ़ने के बाद भी लोग बचत की ओर कदम नहीं बढ़ा पाते हैं. सैलरी आने से पहले ही बचत की तैयारी कर लें. सैलरी आते ही सबसे पहले तय किए हुए पैसों का निवेश करें, इसके बाद ही दूसरे जरुरतों को पूरा करें. ऐसा करने से आपके पास सीमित पैसों का ही संसाधन होगा और आप केवल जरूरी चीजों पर ही खर्च कर पाएंगे.
जिससे फिजूलखर्ची अपने आप ही कम हो जाएगी. ऐसा लंबे समय तक करने से निवेश और बचत की आदत बनती है. सैलरी या इनकम में बढ़ोतरी से लोगों के छोटे-छोटे खर्च बढ़ने लगते है. उदाहरण के लिए पैसों की आमदनी बढ़ने के बाद अक्सर लोग महंगे कपड़े, गैजेट, महंगी छुट्टियों को अपनी जरूरत समझने लगते हैं. हालांकि, इससे पहले भी उनका काम चल रहा होता है. इसलिए खर्च को अपग्रेड करने से पहले एक बार विचार करना चाहिए या खर्च करने से पहले थोड़ा रुककर सोचना आपकी सहायता कर सकता हैं.
सैलरी बढ़ने के बाद कई लोग तुरंत अपनी जीवनशैली बदलने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना हमेशा सही नहीं होता. बेहतर यह है कि किसी भी अपग्रेड को धीरे-धीरे और सोच-समझकर किया जाए. अचानक बड़े खर्च करने के बजाय पहले जरूरी चीजों पर ध्यान देना चाहिए. जैसे अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस लेना और जरूरी खर्चों को प्राथमिकता देना. इस तरह आप बिना दबाव के अपनी लाइफस्टाइल में संतुलित सुधार कर सकते हैं.


