गिरफ्तार किए गए आरोपी की उम्र मात्र 23 वर्ष है, लेकिन उसका तरीका इतना प्रोफेशनल था कि अगर एयर इंटेलिजेंस यूनिट की पैनी नजर न होती, तो यह खेप आसानी से देश में घुस जाती.राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर कस्टम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 46.44 करोड़ रुपये की हाई-प्योरिटी कोकीन जब्त की है. यह ड्रग्स युगांडा से शारजाह के रास्ते भारत लाया गया. इसका मकसद राजधानी में नशे का जाल फैलाना बताया जा रहा है.

इस पूरी तस्करी के पीछे एक बेहद संगठित अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है. गिरफ्तार किए गए आरोपी की उम्र मात्र 23 वर्ष है, लेकिन उसका तरीका इतना प्रोफेशनल था कि अगर एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) की पैनी नजर न होती, तो यह खेप आसानी से देश में घुस जाती.
दरअसल, फ्लाइट G9-463 से सफर कर रहा यह युवक जब ग्रीन चैनल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी इंटेलिजेंस यूनिट के अधिकारियों को उसकी गतिविधियां असामान्य लगीं. शक के आधार पर उसे रोका गया और एक्स-रे जांच के लिए उसका बैग स्कैन किया गया. बैग के किनारों में कुछ संदिग्ध आकृतियां नजर आईं. जांच को और गंभीरता से लेते हुए युवक को तत्काल प्रिवेंटिव रूम ले जाया गया, जहां बैग की परत-दर-परत तलाशी ली गई. आखिरकार, छह पैकेट सफेद पाउडर मिले जिन्हें बड़ी चालाकी से बैग की भीतरी परतों में छिपाया गया था.
एनडीपीएस फील्ड टेस्ट किट से हुई जांच में यह साफ हो गया कि वह सफेद पाउडर कोई आम चीज नहीं, बल्कि हाई-ग्रेड कोकीन है. इसका कुल वजन 3.317 किलोग्राम था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 46.44 करोड़ रुपये आंकी गई है.
तुरंत कार्रवाई करते हुए युवक को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया. उस पर एनडीपीएस एक्ट और कस्टम एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुट गई हैं कि आखिर यह खेप किसके इशारे पर भारत लाई जा रही थी और इसके पीछे कौन-कौन शामिल हैं.
सूत्रों के मुताबिक, यह सिर्फ एक डिलीवरी थी और भी खेप भारत लाए जाने की तैयारी में थीं. एजेंसियां अब इस बात की तह में जा रही हैं कि आरोपी सिर्फ एक मोहरा है या किसी बड़े ड्रग नेटवर्क का हिस्सा.
दिल्ली जैसे शहर में करोड़ों की कोकीन का पकड़ा जाना यह दिखाता है कि नशे का कारोबार किस तेजी से अपने पैर पसार रहा है. ऐसे में कस्टम, नारकोटिक्स और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता ही इस खतरे को टालने की एकमात्र उम्मीद है.इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि 23 साल का यह युवक आखिर किसके इशारे पर काम कर रहा था? क्या भारत में कोकीन की मांग इतनी बढ़ चुकी है कि करोड़ों की खेप लाई जा रही है? देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब वक्त है इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का.


