आपने अपने जीवन में बहुत शादियां देखी होगी लेकिन वलीमा (रिसेप्शन) के लिए तैयार शामियाने में विवाह समारोह का आयोजन कभी नहीं देखा होगा. पुणे में मंगलवार को कुछ ऐसा ही देखने को मिला.

पुणे की बारिश ने ऐसा हाल किया कि शादी के मंडप तक पहुंचने से पहले सब कुछ भीगकर बर्बाद हो गया. ऐसे में मुस्लिम समाज की तरफ से पास में ही निकाह हो रहा था तो उन्होंने इनकी परेशानियों को देखते हुए अपने मंडप को हिंदू समाज की शादी के लिए साझा कर दिया.
कहते हैं कि इंसानियत धर्म से बड़ी होती है. इसका एक बड़ा उदाहरण पुणे में एक शादी समारोह में देखने को मिला. पुणे में कावड़े और गलांडे का परिवार विवाह समारोह बड़े धूमधाम से चल रहा था. हालांकि, मंगलवार को हुई बारिश ने शादी समारोह के रंग में भंग डाल दिया. आयोजन की तैयारियों पर पानी फेर दिया. लेकिन पड़ोसी मुस्लिम परिवार ने उनका साथ दिया. दुल्हन के हताश पिता को अपनी बेटी के रिसेप्शन का मंडप प्रदान किया और शादी मुबारक के मंडप से सीधे मंगलाष्टक की धुन सुनाई देने लगी.
कावड़े और गलांडे परिवारों की शादी मंगलवार शाम को पुणे के घोरपडी स्थित एसआरपीएफ के अलंकार लॉन में हुई. संक्रांति कावड़े और नरेंद्र गलांडे दोनों शादी के लिए तैयार हो गए. आलीशान मंडप सजाया गया था. चेतन कवाडे अपनी बेटी की शादी को भव्य बनाने की पूरी कोशिश कर रहे थे. हालांकि, उसी दिन पुणे में भारी बारिश ने भव्य शादी का मंडप और इकलौती बेटी की भव्य शादी का सपना बहा दिया. शादी का तम्बू पानी से भर गया था. मेहमान, रिश्तेदार और दूल्हा-दुल्हन खुद भीग गए थे.
पूरा परिवार चिंतित हो उठा. कठिन समय में एक हताश पिता की मदद के लिए एक अन्य पिता ने हाथ बढ़ाया. मोहसिन और माहिन का रिसेप्शन पास के ही एक अन्य मंडप में शुरू हो रहा था. यह देखकर पिता सीधे मुस्लिम परिवार के पास गये और उन्हें अपनी बेटी की शादी में घटी घटना के बारे में बताया. उस समय बिना एक पल सोचे, मुस्लिम परिवार ने सीधे संक्रांति और नरेंद्र को लाने के लिए कहा और उन्हें शादी के लिए अपने बेटे के रिसेप्शन हॉल का उपयोग करने की अनुमति दी.
संक्रांति और नरेंद्र का विवाह उसी हॉल में हुआ था, जैसे ही समारोह समाप्त हुआ, काजी परिवार का कार्यक्रम फिर से शुरू हो गया. यह तथ्य कि दो अलग-अलग धर्मों के लोगों का विवाह एक ही मंच पर हुआ, महज संयोग नहीं था, बल्कि एकता का जीवंत उदाहरण था. संक्रांति की मां ने कहा कि अब हम सीधे मोहसिन के पिता फारूक काजी के घर जाएंगे और उन्हें धन्यवाद देंगे.

