Monsoon Update: अगले दो दिन में दिल्ली पहुंचेगा मॉनसून, इन राज्यों में भी देगा दस्तक, जानें इस बार कितनी होगी बारिश

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अगले दो से तीन दिनों में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों तक पहुंचने की उम्मीद है. आईएमडी का कहना है कि इस बार मॉनसून सामान्य तिथि 30 जून से पहले 22 जून तक दिल्ली पहुंच सकता है.

पिछले दो दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य, पश्चिमी और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से को तेजी से कवर कर चुका है और अब अगले दो से तीन दिनों में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों तक पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि दिल्ली में अब भी मौसम मेहरबान है. दिनभर आसमान में बादल छाए रहते हैं और हवाएं चल रही हैं, जिससे मौसम सामान्य बना हुआ है.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) 20 जून से 25 जून के बीच हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख सहित उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में बारिश की भविष्यवाणी की है. आईएमडी का कहना है कि इस बार मॉनसून सामान्य तिथि 30 जून से पहले 22 जून तक दिल्ली पहुंच सकता है.

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, प्राथमिक वर्षा प्रणाली अगले सप्ताह में देश के शेष भागों को कवर कर लेगी, जो सामान्य तिथियों से काफी पहले होगी. बता दें कि इस साल प्राथमिक वर्षा लाने वाली प्रणाली 24 मई को केरल पहुंची, जो 2009 के बाद इसका समय से पहले आगमन था. 2009 में ये 23 मई को पहुंची थी.

दरअसल, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर मजबूत निम्न दबाव प्रणालियों की सहायता से मॉनसून अगले कुछ दिनों में तेजी से आगे बढ़ रहा है. मॉनसून ने 29 मई तक मुंबई सहित मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों और पूरे पूर्वोत्तर को कवर कर लिया. हालाँकि, इसके बाद 29 मई से 16 जून तक लगभग 18 दिनों का लंबा ठहराव आया. जून की शुरुआत में बारिश की कमी के चलते तापमान में तेज वृद्धि देखी गई, जिससे 8-9 जून से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के बड़े हिस्से में लू की स्थिति उत्पन्न हो गई.

17 जून को दो निम्न दबाव वाली प्रणालियां बनने के कारण 16 जून से 18 जून तक मॉनसून तेजी से आगे बढ़ा-एक पश्चिम बंगाल पर और दूसरी गुजरात पर. बता दें कि बारिश की प्रणाली आमतौर पर 1 जून तक केरल में प्रवेश करती है, 11 जून तक मुंबई पहुंचती है और 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेती है. यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देती है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से हट जाती है.

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि केरल या मुंबई में समय से पहले या देरी से आगमन का मतलब यह नहीं है कि देश के अन्य भागों में भी इसी तरह की प्रगति होगी. उनका कहना है कि मॉनसून जटिल वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय कारकों से प्रभावित होता है तथा इसमें महत्वपूर्ण परिवर्तनशीलता होती है. मई में आईएमडी ने पूर्वानुमान लगाया था कि भारत में जून-सितंबर मॉनसून के मौसम में दीर्घावधि औसत (एलपीए) 87 सेमी की 106 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है. बता दें कि 96 प्रतिशत से 104 प्रतिशत के बीच बारिश को “सामान्य” माना जाता है.

लद्दाख, हिमाचल प्रदेश के समीपवर्ती क्षेत्रों, पूर्वोत्तर तथा बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ भागों को छोड़कर देश के अधिकांश भागों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है. वहीं, पंजाब, हरियाणा, केरल और तमिलनाडु के कुछ अलग-अलग क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.

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