MP की राजधानी भोपाल के वीआईपी इलाके ’74 बंगला’ स्थित सरकारी आवास अमूमन सत्ता और राजनीति के केंद्र होते हैं, लेकिन बंगला नंबर B-1 एक अलग ही मिसाल पेश कर रहा है. रहली विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का यह सरकारी घर अब एक ‘मरीज घर’ और ‘सेवा सदन’ बन चुका है.मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और मौजूदा बीजेपी गोपाल भार्गव ने अपने भोपाल स्थित सरकारी बंगले को पूरी तरह से मरीजों और उनके परिजनों के लिए समर्पित कर दिया है. पिछले 23 साल से जारी यह मिशन अब और अधिक आधुनिक और सर्व-सुविधायुक्त हो गया है.
भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने इस आवास में एक अनोखा बदलाव किया है. उन्होंने दिल की बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए एक खास किड्स गेस्ट रूम डिजाइन करवाया है, जो प्ले स्कूल की तरह दिखता है. यही नहीं, दीवारों पर कार्टून पेंटिंग्स, खिलौने और झूले लगाए गए हैं ताकि गंभीर बीमारी के बीच भी बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य और मूड ठीक रहे.
मरीजों के लिए केवल छत ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक भोजन की भी व्यवस्था है. बंगले के बड़े हिस्से में 70 नए बेड, ताज़ा चादर, तकिया और कंबल की व्यवस्था की गई है.वहीं, ‘गोपाल जी की रसोई’ में मरीजों को मटर पनीर, मलाई कोफ्ता से लेकर दलिया और खिचड़ी तक, घर जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन दिया जाता है. रहना, नाश्ता और दोनों समय का भोजन पूरी तरह मुफ्त है.

बता दें कि सेवा का यह चक्र सागर जिले के गढ़ाकोटा से शुरू होकर राजधानी भोपाल तक आता है. हर रविवार सुबह 11 बजे गढ़ाकोटा स्थित ‘गणनायक’ निवास से एंबुलेंस मरीजों को लेकर करीब 250 किमी का सफर कर भोपाल आती है. भोपाल में मरीजों को अस्पताल ले जाने और वापस लाने के लिए निजी वाहन और एंबुलेंस 24 घंटे तैनात रहते हैं. बंगले पर प्राथमिक इलाज, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और इमरजेंसी के लिए सेवक मौजूद रहते हैं.
गोपाल भार्गव के अनुसार, सरकारी बंगले का ढांचा भले ही सरकारी हो, लेकिन अंदर की तमाम व्यवस्थाएं, बिस्तर, एंबुलेंस का ईंधन और भोजन का खर्च वहखुद के निजी फंड से वहन करते हैं. पहले आयुष्मान कार्ड या मुख्यमंत्री सहायता निधि से मदद ली जाती है, अगर वहां से संभव न हो तो भार्गव स्वयं इलाज का खर्च उठाते हैं. दुर्भाग्यवश यदि किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है, तो पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक उनके गृह ग्राम तक पहुंचाने के लिए विशेष वाहन की व्यवस्था भी निशुल्क है.
विधायक गोपाल भार्गव का यह मिशन 2004 से निरंतर जारी है. अब तक लगभग 30 हजार गरीब मरीज इस व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं. उनका मानना है कि कोई भी व्यक्ति धन के अभाव में इलाज से वंचित न रहे और न ही इलाज के बोझ तले कर्जदार बने.

