NATIOANL : पुणे में पीएचडी छात्रा ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में छेड़छाड़ और उत्पीड़न का जिक्र, रिसर्च गाइड गिरफ्तार

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पुणे में पीएचडी छात्रा की आत्महत्या के मामले में एक रिसर्च गाइड को गिरफ्तार किया गया है. छात्रा ने सुसाइड नोट में उसके साथ छेड़छाड़ किए जाने और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

महाराष्ट्र के पुणे शहर से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 30 वर्षीय पीएचडी छात्रा की मौत ने सबको झकझोर दिया है. यह घटना चिंचवड़ इलाके की है, जहां छात्रा ने अपने घर पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. इस मामले ने तब गंभीर मोड़ ले लिया, जब जांच में सामने आया कि छात्रा लंबे समय से मानसिक उत्पीड़न का शिकार थी.

इस घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है. अब यह मामला न केवल आत्महत्या बल्कि यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से भी जुड़ गया है. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान डॉ. ए. बेन्नीमिन के रूप में हुई है, जो बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) के कोरेगांव पार्क स्थित कार्यालय के प्रमुख हैं.

आरोप है कि डॉ. ए. बेन्नीमिन मृतक छात्रा के रिसर्च गाइड थे और पिछले दो वर्षों से वह उनके अधीन पीएचडी कर रही थी. छात्रा के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया और आरोपी को हिरासत में लिया. इस गिरफ्तारी ने पूरे शैक्षणिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जांच के दौरान सबसे छात्रा का एक सुसाइड नोट सामने आया है, जो अहम सबूत माना जा रहा है. इस नोट में उसने अपने रिसर्च गाइड को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है. परिवार का आरोप है कि अगस्त 2025 से ही छात्रा को लगातार परेशान किया जा रहा था. इसमें अनुचित व्यवहार, छेड़छाड़ और मानसिक दबाव जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. यह सुसाइड नोट अब जांच का आधार बन गया है.

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. इनमें आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment of suicide) और महिला के साथ मारपीट व छेड़छाड़ से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. जांच अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही है.

पुलिस इंस्पेक्टर भोजराज मिसाल ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 15 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. पूछताछ के दौरान आरोपी से कई अहम सवाल किए जा रहे हैं और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि छात्रा पर किस तरह का दबाव बनाया जा रहा था. साथ ही, आरोपी के खिलाफ अन्य संभावित शिकायतों की भी जांच की जा रही है.

यह मामला एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी करता है. खासकर रिसर्च गाइड और छात्रों के बीच संबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है. फिलहाल, जांच पड़ताल जारी है और परिवार न्याय की मांग कर रहा है. यह घटना उन तमाम छात्रों के लिए चेतावनी है जो किसी भी प्रकार के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं.

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