NATIOANL : ममता बनर्जी के सत्ता गंवाने की ये रहीं 5 बड़ी वजह…

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पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी पहली बार राज्य में सत्ता में आने जा रही है और उसे दो-तिहाई से ज़्यादा बहुमत मिला है. बीजेपी ने जहां 206 सीटें जीत ली हैं, वहीं टीएमसी 80 पर ही जीत दर्ज कर सकी है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अपनी भवानीपुर सीट से बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी से 15 हज़ार से अधिक वोटों से हार गईं. उससे पहले मतगणना के दौरान ही उन्होंने बीजेपी पर ‘वोट लूट’ का आरोप लगाया.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “बीजेपी ने 100 से ज्यादा सीटों की लूट की है. बीजेपी की जीत अनैतिक है. इलेक्शन कमीशन ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ मिलकर जो किया है वो पूरी तरह अनैतिक है.”

उन्होंने जोर-जबरदस्ती से एसआईआर करने के आरोप लगाए और कहा, “उन्होंने अत्याचार किया. काउंटिंग एजेंटों को गिरफ़्तार किया. हम वापसी करेंगे.”

लेकिन पंद्रह साल तक लगातार सत्ता में रहने के बाद, तृणमूल कांग्रेस की इस चुनावी हार की वजह क्या हो सकती है, इसे लेकर काफ़ी चर्चा है.अब तक सामने आए नतीजों और रुझानों के आधार पर इस हार के पीछे पांच प्रमुख कारण माने जा रहे हैं.ममता बनर्जी, शुभेंदु अधिकारी और विजय के साथ-साथ चर्चित चेहरों की सीट का हाल जानिए

ममता बनर्जी के मज़बूत क़िले में कैसे हुई बीजेपी की एंट्री

  1. महिला सुरक्षा का सवाल
    कोलकाता में बीबीसी संवाददाता इशाद्रिता
    इमेज कैप्शन,कोलकाता में बीबीसी संवाददाता इशाद्रिता ने महिलाओं से बात की
    इसमें बहुत कम शक है कि पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं का बड़ा हिस्सा लंबे समय से ममता बनर्जी की पार्टी का समर्थन करता रहा है.

स्कूली लड़कियों को साइकिल बांटने की योजना समेत लक्ष्मीर भंडार, कन्याश्री और सबुज साथी जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच तृणमूल सरकार को काफ़ी लोकप्रिय बनाया था.

लेकिन इस बार यह समर्थन आधार टूटता हुआ दिखाई दे रहा है. इसकी एक बड़ी वजह महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पार्टी की कथित नाकामी हो सकती है.

दो साल पहले हुआ आरजी कर आंदोलन इस चुनाव को प्रभावित करता दिखा. इसका बड़ा उदाहरण पानीहाटी है, जिसे पारंपरिक तौर पर तृणमूल का गढ़ माना जाता रहा है.

वहां आरजी कर मामले में महिला की मां बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में थीं और उन्होंने 28,836 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

पश्चिम बंगाल कवर कर रहे बीबीसी संवाददाताओं से भी कुछ महिलाओं की बातों सुरक्षा जैसे मुद्दे आए.

चुनाव प्रचार जब चल रहा था तो एक महिला ने टीएमसी सरकार के फिर से आने के सवाल पर कहा था, “क्या अब हम सुरक्षित भी रह पाएंगे? यही डर है. मैं अपने इन भाइयों की बात से सहमत हूं, मेरे पास अलग से कहने के लिए कुछ नहीं है. महिलाओं की अब कोई इज़्ज़त नहीं बचेगी. बिल्कुल भी नहीं. वे हमें तोड़कर रख देंगे. नहीं तो हमें यह क्यों सोचना पड़ता कि अभया की मां को जीत के बाद ही न्याय मिलेगा? क्या राज्य की हालत अब ऐसी हो गई है? क्या आप सोच सकते हैं कि वे हमारे साथ क्या करेंगे?”

कोलकाता में एक महिला के तौर पर सुरक्षित महसूस करने के सवाल पर एक महिला ने कहा, “आरजी कर घटना के बाद मैं अपने साथ कुछ सुरक्षा उपाय लेकर चलती हूं.”

एक अन्य युवती ने कहा, “कुछ जगहें अनसेफ़ महसूस होती हैं और रात के 9 -10 बजे के बाद तो असुरक्षित महसूस होता है.”

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