NATIONAL : समाधियों से चमत्कार नहीं, बल्कि रहस्य उजागर होते हैं: पू. मोरारीबापू

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पूज्य मोरारीबापू की निम्बार्की परंपरा के मूल महापुरुष पूज्य ध्यान स्वामी बापा की पावन स्मृति में हर साल महा सुद पूनम के दिन होने वाला पाटोत्सव और ध्यान स्वामी बापा अवॉर्ड कार्यक्रम आज, 1 फरवरी को सेंजलधाम में संपन्न हुआ।


यह अवॉर्ड हर साल गुजरात के उन पूजा स्थलों को दिया जाता है जो भोजन, प्रार्थना और सेवा प्रदान करते हैं। जिसमें 1.25 लाख रुपये और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। इस साल यह अवॉर्ड भगतके गांव में प्रसिद्ध श्री पू. लालजी महाराज के स्थान को दिया गया। वहां के महंत पूज्य दुर्गादासजी बापू ने इसे सहर्ष स्वीकार किया।
इस समारोह में अपनी खुशी और गर्व व्यक्त करते हुए पू. श्री मोरारी बापू ने कहा कि इस प्रोग्राम के ज़रिए हम स्थान की तपस्या और साधना को नमन करते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि आप सब इसे स्वीकार करते हैं। सबसे बड़ा लक्ष्य है, अनंत समानता का आनंद लेना। अगर इसमें चार चीज़ें हों, तो ऐसी समानता का आनंद मिल सकता है। जिसमें साधु, शास्त्र, गुरु और समाधि की चार सेवाएं बहुत ज़रूरी और सार्थक हैं। हम समाधि को चेतन कहते हैं लेकिन हम इसे सत समाधि भी कह सकते हैं। इसलिए, समाधि चमत्कार नहीं करतीं बल्कि हम सबको एहसास कराती हैं।

प्रोग्राम का स्वागत श्री तुलसीदासबापू हरियाणी (गुरुधाम अखेगढ़) ने किया। मॉडरेटर, कवि और गायक श्री हरिश्चंद्र जोशी ने पूरे काम की शुरुआत की और रिपोर्ट पेश की। जानकारी के मुताबिक, यह अवॉर्ड समारोह 15वीं थी, अवॉर्ड्स की संख्या 18 थी। शुरुआत में साधु समाज की सेवा के लिए काम कर रहे दो महानुभावों, आदरणीय श्री बंसीबापू कंत्रोडी और भावनगर के डॉ. संजय रवि साहेब को उनकी अनोखी सेवा के लिए सम्मानित किया गया। 30 से 1 तारीख तक तीन दिन तक चले पाटोत्सव के आखिरी दिन, यानी 1 फरवरी को साधु समाज की 34 बेटियों और सेंजलधाम की एक बेटी समेत कुल 35 बेटियों का सामूहिक विवाह भी हुआ।
आज के सम्मान समारोह में श्री जानकीदास बापू (कमिजला), श्री जीनारामजी बापू (सीहोर), श्री रघुराम बापा (वीरपुर), श्री गणेशदासजी बापू आदि जगहों के महंत भी मौजूद थे। मंच और छबीकला का इंतज़ाम श्री नीलेशभाई वावड़िया ने किया।

वेलावदार (तखुभाई सांडसुर द्वारा)

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