सहारनपुर में कथित फर्जी ‘हाफ एनकाउंटर’ मामले में जेल में जज की पूछताछ में कैदी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. कैदी ने कहा कि उसे जबरन उठाकर करंट दिया गया और पैर में गोली मारकर मारी.सहारनपुर में कथित फर्जी ‘हाफ एनकाउंटर’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा हाल ही में पुलिस के एनकाउंटर तरीकों पर सख्त टिप्पणी किए जाने के एक सप्ताह के भीतर देवबंद कोर्ट के एसीजीएम परविंदर सिंह खुद देवबंद जेल पहुंच गए.
उन्होंने एनकाउंटर में घायल कैदियों को लाइन में खड़ा कर पूछताछ की. इस निरीक्षण का वीडियो भी वायरल हो गया है, जिससे पुलिस महकमे में हलचल मची हुई है. हालांकि पुलिस विभाग इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है.
जेल में पूछताछ के दौरान एक ऐसा कैदी सामने आया, जिसने कथित फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है. जज ने उससे विस्तार से सवाल किए. कैदी का आरोप है कि उसकी सहारनपुर में तारीख थी और वह बागपत से आ रहा था. उसे शामली पार्क से उठा लिया गया. उसने दावा किया कि उसकी मोबाइल लोकेशन इसकी पुष्टि कर सकती है. आरोप है कि उसे चौकी ले जाकर करंट लगाया गया, मारपीट की गई और जबरन अपराध कबूल कराने का दबाव बनाया गया.

कैदी ने आगे कहा कि शाम के बाद उसे जंगल में ले जाया गया. फिर थाने से बाइक लाकर उसके पैर पर कपड़ा रखकर करीब 8 इंच की दूरी से गोली मारी गई. उसने आरोप लगाया कि बाद में पुलिस ने खुद कट्टे से फायरिंग कर मुठभेड़ का रूप दे दिया. जज ने जब पूछा कि गोली कैसे मारी गई, तो कैदी ने बैठकर पूरा घटनाक्रम दोहराया. अन्य ‘हाफ एनकाउंटर’ में घायल कैदियों से भी पूछताछ की गई.
एक सप्ताह पूर्व इलाहाबाद हाई कोर्ट की हालिया टिप्पणी फिर चर्चा में आ गई. एनकाउंटर से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा था कि उत्तर प्रदेश को ‘पुलिस राज्य’ बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने यह भी कहा था कि कुछ पुलिस अधिकारी समय से पहले प्रमोशन और प्रशंसा पाने के लिए आरोपियों के पैरों में गोली मारकर चोट पहुंचाते हैं. हाईकोर्ट ने DGP राजीव कृष्ण और अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद की मौजूदगी में यह टिप्पणी की थी.

