National : खामेनेई अपने बेटे को नहीं बनाना चाहते थे ईरान का सुप्रीम लीडर, मगर क्यों? वसीयत को लेकर किया बड़ा दावा

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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की 28 फरवरी को एयरस्ट्राइक में मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है.ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक बहुत कम लोग चाहते थे कि मोजतबा खामेनेई ईरान के अगले सुप्रीम लीडर बनें. यहां तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके अपने पिता अली खामेनेई भी इस फैसले के पक्ष में नहीं थे.

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की 28 फरवरी को एयरस्ट्राइक में मौत हो गई थी. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अली खामेनेई ने अपनी वसीयत में साफ लिखा था कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी न बनाया जाए. हालांकि ईरान की ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दबाव डालकर मोजतबा को इस पद तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

विशेषज्ञों के अनुसार, अली खामेनेई को अपने बेटे की योग्यता को लेकर गंभीर संदेह था. विपक्षी संगठन नेशनल यूनियन फॉर डेमोक्रेसी के रिसर्च डायरेक्टर खोसरो इस्फहानी ने कहा कि अली खामेनेई ने अपनी वसीयत में साफ तौर पर लिखा था कि मोजतबा को उत्तराधिकारी न बनाया जाए. इस्फहानी के मुताबिक अली खामेनेई का मानना था कि मोजतबा के पास देश चलाने के लिए जरूरी अनुभव और राजनीतिक कद नहीं है. उन्होंने कहा, “मोजतबा एक युवा धर्मगुरु हैं, जिन्होंने राजनीति में कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं की है.” इस्फहानी ने यह भी कहा कि इतने सालों तक मोजतबा की पहचान सिर्फ अपने पिता के नाम की वजह से ही रही है.

ईरान में सुप्रीम लीडर चुनने की जिम्मेदारी आमतौर पर असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नाम की संस्था की होती है. यह धर्मगुरुओं की एक परिषद है, जो देश के सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है. लेकिन इस्फहानी के अनुसार मोजतबा की नियुक्ति सामान्य प्रक्रिया के तहत नहीं हुई. उनका कहना है कि जब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स इस मुद्दे पर विचार कर रही थी, तब IRGC ने उस पर दबाव डाला और अंत में फैसला मोजतबा के पक्ष में करवा दिया. इस्फहानी ने ईरान के अंदर मौजूद अपने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि मोजतबा को परिषद में बहुमत के वोट भी नहीं मिले थे. बताया जा रहा है कि IRGC के दबाव के कारण कई धर्मगुरुओं ने उस बैठक का बहिष्कार कर दिया, जिसमें नए सुप्रीम लीडर के नाम की घोषणा की गई थी.इस्फहानी ने कहा कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने वास्तव में मोजतबा के पक्ष में मतदान नहीं किया था. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ काफी विरोध था, लेकिन IRGC के दबाव के चलते उन्हें उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया. इस्फहानी के अनुसार, ईरान की यह ताकतवर सैन्य संस्था मोजतबा को ऐसा नेता मानती है जिसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने कहा, “वे उन्हें एक कठपुतली की तरह देखते हैं, जिस पर वे अपनी मर्जी से असर डाल सकते हैं.”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. ट्रंप ने कहा कि मोजतबा खामेनेई शांति से नहीं रह पाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अली खामेनेई के दूसरे बेटे को ईरान का नया नेता बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता. मोजतबा की नियुक्ति से पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को ईरान के अगले नेता के चयन में भूमिका होनी चाहिए, जैसे पहले वेनेजुएला के मामले में अमेरिका ने हस्तक्षेप किया था. एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि 56 साल के मोजतबा खामेनेई का अपने पिता के बाद ईरान का प्रमुख बनना स्वीकार नहीं है.

ट्रंप ने कहा कि वे चाहते हैं कि ईरान में ऐसा नेता आए जो देश में शांति और संतुलन ला सके. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई ऐसा नेता बनाया जाता है जो अली खामेनेई की नीतियों को ही आगे बढ़ाएगा, तो इससे अमेरिका को पांच साल के भीतर फिर से युद्ध का सामना करना पड़ सकता है. रविवार को एबीसी न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “उन्हें हमसे मंजूरी लेनी होगी. अगर उन्हें हमारी मंजूरी नहीं मिली तो वे ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे.”

56 साल के मोजतबा खामेनेई ने इससे पहले कभी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला था. उनका प्रभाव मुख्य रूप से अपने पिता के करीबी दायरे में काम करने से बढ़ा था. इसी दौरान ईरान में सख्त रूढ़िवादी नीतियां और मजबूत होती गईं.
2000 के दशक में लीक हुए अमेरिकी कूटनीतिक दस्तावेजों में उन्हें “पावर बिहाइंड द रोब्स” यानी पर्दे के पीछे की ताकत बताया गया था. उसी समय उन पर यह आरोप भी लगा था कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने में भूमिका निभाई थी ताकि सत्ता के समर्थक उम्मीदवार जीत सकें.

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