NATIONAL : डोसा या जहर? दो मासूम बेटियों की मौत ने लिया खौफनाक मोड़, ब्लड रिपोर्ट में जहर, डायरी ने खोला बेटे की चाहत का राज

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अहमदाबाद के चांदखेड़ा में डोसा खाने के बाद दो मासूम बेटियों की मौत मामले में बड़ा मोड़ आया है. माता-पिता के ब्लड में एल्युमिनियम फॉस्फाइड और जिंक की अधिक मात्रा मिली है. घर से सेल्फोस पैकेट और पुत्र प्राप्ति का जिक्र वाली डायरी भी बरामद हुई. पुलिस अब सामूहिक आत्महत्या के प्रयास के एंगल से जांच कर रही है, अंतिम निष्कर्ष एफएसएल रिपोर्ट पर निर्भर है.

अहमदाबाद में डोसा खाने के बाद दो मासूम बेटियों की शंकास्पद मौत का मामला अब नया मोड़ लेता दिख रहा है. अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके में रहने वाले प्रजापति परिवार की इस घटना में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. माता-पिता के ब्लड सैंपल में एल्युमिनियम फॉस्फाइड और जिंक की अधिक मात्रा मिलने के बाद यह मामला अब फूड पॉइजनिंग से आगे बढ़कर सामूहिक आत्महत्या के प्रयास की आशंका की दिशा में जांच का केंद्र बन गया है. हालांकि, पुलिस अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है

चांदखेड़ा पुलिस थाने के इंस्पेक्टर एम.के. मकवाना के अनुसार, अस्पताल में भर्ती पिता विमल और मां भावना के ब्लड सैंपल जांच के लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी भेजे गए थे. रिपोर्ट में दोनों के शरीर में एल्युमिनियम फॉस्फाइड और जिंक की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई है. डॉक्टरों से इस रासायनिक मौजूदगी के कारणों पर राय ली जा रही है.

पुलिस ने उस डेरी के मालिक और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं जहां से डोसा बनाने के लिए खीरू खरीदा गया था. डेरी के सीसीटीवी फुटेज भी जब्त किए गए हैं और खीरू खरीदने वाले अन्य ग्राहकों से भी पूछताछ की गई है. अब तक की जांच में यह सामने आया है कि खीरू से बनी चीजें खाने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं हुई.

पुलिस अब दो संभावित दिशाओं में जांच कर रही है. पहला, क्या डोसा खाने से मौत हुई, और दूसरा, क्या घर में किसी कारण से सामूहिक आत्महत्या का प्रयास किया गया. इंस्पेक्टर मकवाना ने बताया कि विमल और भावना सहित परिजनों से पूछताछ जारी है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेगा.

जांच के दौरान पुलिस को घर से गेहूं को सुरक्षित रखने में इस्तेमाल होने वाले सेल्फोस पाउडर के पैकेट भी मिले हैं. विमल ने बताया कि उसने 27 मार्च को रामनगर से सेल्फोस के करीब 10 पैकेट खरीदे थे. कुछ पैकेट गेहूं में उपयोग किए गए जबकि बाकी अलग रखे गए थे. पुलिस ने बरामद पैकेटों को भी जांच के लिए एफएसएल भेज दिया है.

जांच के दौरान पुलिस को घर से एक डायरी भी मिली है, जिसमें पुत्र प्राप्ति की इच्छा का उल्लेख है. विमल की पहले से एक बेटी थी और बाद में दूसरी बेटी हुई थी. डायरी में पुत्र जन्म होने पर मंदिर में दर्शन करने की बात लिखी गई है. हालांकि परिवार लगातार डोसा खाने की वजह से तबीयत बिगड़ने का ही बयान दे रहा है और अब तक उनके बयानों में कोई विरोधाभास सामने नहीं आया है.

पुलिस का कहना है कि यदि सामूहिक आत्महत्या का प्रयास साबित होता है तो दोनों मासूम बेटियों की हत्या और पत्नी की हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हो सकता है. अगर जांच में पत्नी की भूमिका सामने आती है तो मामला और जटिल हो जाएगा.

जानकारी के मुताबिक, प्रजापति परिवार ने 1 और 2 अप्रैल को खरीदे गए खीरू से घर में डोसा बनाया था. इसके बाद तबीयत बिगड़ने पर पति-पत्नी अपने दो मासूम बेटियों के साथ अस्पताल में भर्ती हुए, जहां तीन महीने की राहा और चार साल की मिस्टी की मौत हो गई. शुरुआत में बच्चियों के दादा गौरीशंकर प्रजापति ने डोसा खाने से मौत होने की आशंका जताई थी.

पुलिस को 5 अप्रैल को मामले की जानकारी मिली, जब चार साल की बच्ची की मौत हुई. इससे पहले 4 अप्रैल को तीन महीने की बच्ची की मौत हो चुकी थी और परिजनों ने इसे सामान्य मृत्यु मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था. बाद में पुलिस जांच शुरू होने पर परिवार की सहमति से शिशु का शव निकालकर एफएसएल की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया.

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