National : दोस्त समझकर इस देश को अमेरिका ने दिए थे F-16 जैसे फाइटर जेट, लेकिन अब है कट्टर दुश्मन

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वेनेजुएला और अमेरिका एक समय में काफी करीबी दोस्त थे. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि दोनों देशों के बीच दोस्ती दुश्मनी में बदल गई. आइए जानते हैं क्या है इसकी वजह. अमेरिका कभी इस देश पर इतना भरोसा करता था कि उसने इसे अपना करीबी स्ट्रैटेजिक पार्टनर मानते हुए एडवांस F-16 फाइटर जेट दिए थे. लेकिन आज के हालात काफी अलग हैं. उसी देश को अब अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक माना जाता है. वह देश है वेनेजुएला. पिछले कुछ दशकों में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्ते काफी बदल गए हैं.

जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में सत्ता में आए हैं यूएस की फॉरेन पॉलिसी और भी ज्यादा एग्रेसिव हो चुकी है. दूसरे टर्म में ट्रंप ने कनाडा, पनामा, वेनेजुएला, ग्रीनलैंड, ईरान और क्यूबा समेत कई देशों को खुलेआम धमकी दी है. जनवरी में अमेरिकी सेना ने ट्रंप के डायरेक्शन में वेनेजुएला में एक ऑपरेशन शुरू किया. इस ऑपरेशन के नतीजे में प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को सत्ता से हटा दिया गया. इसके तुरंत बाद सत्ता में आए वेनेजुएला के नए नेताओं ने ट्रंप को सपोर्ट करना शुरू कर दिया. इसके बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच डायनामिक्स बदल गए.

हालांकि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्ते हमेशा उतार चढ़ाव से भर रहे हैं. एक समय में काफी करीबी सहयोगी थे लेकिन आज वे ग्लोबल पॉलिटिक्स में अलग-अलग तरफ खड़े हैं. 1980 के दशक में यूनाइटेड स्टेट्स और वेनेजुएला के बीच रिश्ते काफी मजबूत थे. वेनेजुएला में अमेरिका के सपोर्ट में सरकार थी और कोल्ड वॉर के दौरान लैटिन अमेरिका में उसे एक अहम सहयोगी के तौर पर देखा जाता था. इस स्ट्रैटेजिक दोस्ती की वजह से यूनाइटेड स्टेट्स ने 1983 में वेनेजुएला को करीब 24 F-16 फाइटर फाल्कन जेट बेचे. उस समय वेनेजुएला इन एडवांस्ड अमेरिकन फाइटर जेट्स को ऑपरेट करने वाला पहला लैटिन अमेरिकन देश था.

1999 में जब ह्यूगो शावेज वेनेजुएला में पावर में आए तो रिश्ते बिगड़ने लगे. शावेज ने मजबूत एंटी अमेरिकन पॉलिसी को अपनाया और इस इलाके में यूनाइटेड स्टेट्स के असर को चैलेंज करना शुरू कर दिया. उन्होंने रूस और चीन जैसे देशों के साथ भी वेनेजुएला के रिश्ते मजबूत किए. इससे अमेरिका और भी ज्यादा परेशान हो गया. 2006 में हालात और खराब हो गए. यूनाइटेड स्टेट्स ने वेनेजुएला पर आर्म्स एम्बार्गो लगा दिया. इस वजह से वेनेजुएला को अपने अमेरिका में बने हथियारों के लिए स्पेयर पार्ट्स, अपग्रेड या फिर टेक्निकल मेंटेनेंस लेने की इजाजत नहीं थी. इस फैसले ने वेनेजुएला के F-16 फ्लीट पर काफी बुरा असर डाला .

इसके बाद वेनेजुएला ने कथित तौर पर अपने एयरक्राफ्ट को ऑपरेशनल रखने के लिए दूसरे तरीके खोजे. रिपोर्ट के मुताबिक देश ने जेट्स को मेंटेन करने के लिए ईरान से मदद मांगी या फिर रूस और चीन को एयरक्राफ्ट की टेक्नोलॉजी को स्टडी करने की इजाजत दी. ऐसी संभावनाओं से यूनाइटेड स्टेट्स काफी नाराज था. उसे डर था कि सेंसिटिव मिलिट्री टेक्नोलॉजी को रिवर्स इंजीनियर किया जा सकता है.

समय के साथ पुराने हो रहे अमेरिकी जेट्स को मेंटेन करना और भी मुश्किल होता गया. जैसे-जैसे अमेरिका के साथ रिश्ते खराब होते गए वेनेजुएला ने रूसी मिलट्री इक्विपमेंट की तरफ रुख किया. पुराने अमेरिकी जेट्स की जगह रूसी सुखोई Su-30 फाइटर जैट ने ले ली.

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