बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दिल्ली में उन्हें आवंटित टाइप-आठ बंगला मामले में सफाई दी है. लखनऊ में एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सुरक्षा खतरे के चलते उन्हें पूर्व में भी ऐसा बंगला आवंटित किया जाता रहा है. इसलिये इस मामले पर किसी तरह की अनर्गल बातें और राजनीति ना की जाए. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगाह करते हुए कहा, ‘जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा तो साम-दाम-दंड-भेद आदि हथकंडे अपनाकर बसपा को सत्ता से दूर रखने के विरोधियों के षड्यंत्र और भी बढ़ते जाएंगे. बसपा कार्यकर्ता किसी बहकावे में न आयें और अगले चुनाव की तैयारी में तन-मन-धन से लगे रहें.’

इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ने की खबरों को गुमराह करने की नीयत से फैलायी जा रही ‘फेक न्यूज’ करार देते हुए बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी अगला चुनाव अपने बलबूते ही लड़ेगी. मायावती ने कहा कि इस तरह की खबरें फैलायी जा रही हैं कि बसपा उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ेगी. इसकी आम चर्चा है जो विशुद्ध रूप से लोगों को गुमराह करने की नीयत से फैलायी जा रही ‘फेक न्यूज’ है. उन्होंने कहा, ‘यह बिल्कुल गलत, झूठ, हवा-हवाई एवं मनगढ़ंत खबर है. ऐसे में नेताओं के साथ-साथ मीडिया को भी इस प्रकार की खबरों से बचना चाहिए.’
पूर्ण बहुमत की अपनी सरकार जरूर बनाएं- मायावती
मायावती ने दिल्ली में हो रही ‘एआई समिट’ पर भी परोक्ष रूप से तंज किया और कहा, ‘व्यापक देशहित और जनहित की कड़वी हकीकत के बारे में देश व दुनिया को जागृत करके लोकतंत्र एवं संविधान को मजबूती प्रदान करने के बजाय इन दिनों ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (कृत्रिम मेधा) को सफलता की कुंजी बताने वाली स्वार्थी चर्चाएं हो रही हैं. इस बीच मीडिया जगत में भी किसी न किसी बहाने बसपा के बारे में यह चर्चा है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में विधानसभा का अगला चुनाव गठबंधन में लड़ेगी. यह बिल्कुल झूठ है.’
बसपा प्रमुख ने कहा कि वह अपनी पार्टी द्वारा अपने बलबूते पर चुनाव लड़ने के बारे में सार्वजनिक तौर पर कई बार ऐलान कर चुकी हैं और खासतौर से नौ अक्टूबर 2025 को बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर लखनऊ में आयोजित महारैली में भी इसकी खुली घोषणा की जा चुकी है. अब ऐसी किसी भी चर्चा या बहस की कोई गुंजाइश नहीं बची है. हालांकि, साजिश के तहत कुछ लोगों और मीडिया के एक वर्ग द्वारा इस तरह की फर्जी खबरें फैलाई जा रही हैं. इसे बसपा विरोधी हथकंडा ही माना जाएगा जिस पर लोगों को ध्यान देने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है.मायावती ने कहा कि बसपा कार्यकर्ताओं को यह अच्छी तरह मालूम है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सोच ‘संकीर्ण’ है. साथ ही, परम पूज्य बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का ‘विरोधी’ होने के कारण इनका आंबेडकरवादी होना तथा बसपा से गठबंधन करने की नीति केवल चुनावी स्वार्थ है. बसपा प्रमुख ने कहा कि गठबंधन करने से बसपा को केवल नुकसान ही होता है, इसीलिए बसपा के लोग 2027 का विधानसभा चुनाव अकेले ही पूरे जी जान से लड़ेंगे.
उन्होंने आरोप लगाया, ‘बसपा कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाने के लिए ही विरोधी पार्टियां घिनौनी साजिशें करती रहती हैं. ऐसे में पार्टी के सभी लोगों से यही अनुरोध है कि वह ऐसी अनर्गल और मनगढ़ंत बातों पर कतई ध्यान ना दें और वह (कार्यकर्ता) हाथी की मस्त चाल की तरह आगे बढ़ते रहें तथा वर्ष 2007 की तरह अकेले ही यह चुनाव लड़कर फिर से बसपा की पूर्ण बहुमत की अपनी सरकार जरूर बनाएं.’


