व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि सेंट्रल मार्केट में भूखंडों का लैंड यूज चेंज करने के नाम पर अधिकारियों ने करोड़ों रुपये व्यापारियों से वसूल लिए और उन्हें बाकायदा एनओसी जारी कर दी गई
मेरठ में सेंट्रल मार्केट की दुकानों को सील करने के विरोध में कारोबारियों ने गुरुवार को मेरठ बंद का ऐलान किया है. इस बंद को सफल बनाने के लिए 655 व्यापारिक संगठनों और व्यापार संघों ने आह्वान किया है. बंद को प्रभावी बनाने के लिए संयुक्त व्यापार संघ ने 27 टीमें बनाई हैं. हालांकि इस दौरान आवश्यक सेवाओं पर असर नहीं पड़ेगा. दूध और ब्रेड जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति नहीं रोक जाएगी.
इसके अलावा परिवहन सेवाएं सुचारु रहेंगी, दवा दुकानें बंद रहेंगी. प्राइवेट अस्पतालों में सुबह की ओपीडी बंद रहेंगी पर आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी. पेट्रोल पंप दोपहर 3 बजे तक बंद रहेंगे. गैस की बुकिंग ऑनलाइन होने के कारण व्यापारी इसकी सप्लाई को प्रभावित नहीं करेंगे. हालांकि एजेंसियों के शटर पूरी तरह बंद रखे जाएंगे. इस बंदी को जिला बार, पेट्रोप पंप एसोसिएशन और आईएमए ने भी अपना समर्थन दिया है.

वहीं इस मामले में व्यापारियों ने लामबंद होकर आवास विकास के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि सेंट्रल मार्केट में भूखंडों का लैंड यूज चेंज करने के नाम पर अधिकारियों ने करोड़ों रुपये व्यापारियों से वसूल लिए और उन्हें बाकायदा एनओसी जारी कर दी गई लेकिन बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट में गलत रिपोर्ट पेश कर दी जिसका नतीजा ये हुआ कि आज सेंट्रल मार्केट में 44 भवनों पर सील लग गई और आज सैकड़ो परिवारों के हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट आ खड़ा हुआ. सेंट्रल मार्केट में सैकड़ो व्यापारी धरने पर बैठे हुए हैं.
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों को बुरी तरह से लताड़ लगाई और जवाब तलब करते हुए पूछा कि अभी तक सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई क्यों अमल में नहीं लाई गई. इसके बाद 8 अप्रैल को आवास विकास , पुलिस प्रशासन और तमाम विभागों की टीमें यहां पहुँची और कार्रवाई की.

