जगतगुरु पूज्य स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी जी महाराज के पावन आगमन पर वृंदावन धाम में संत समाज, आचार्यगण एवं हजारों श्रद्धालु भक्तों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, पुष्पवर्षा, शंखनाद एवं जयघोष के मध्य महाराज जी का अभिनंदन किया गया, जिससे सम्पूर्ण क्षेत्र आध्यात्मिक उल्लास से भर उठा।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा फूलों की होली खेली गई। पूरा वातावरण पुष्प वर्षा और “हर-हर महादेव” तथा “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से गूंज उठा। भक्तगण अत्यंत उत्साह एवं आनंद में झूमते दिखाई दिए। इस अवसर पर मिष्ठान वितरण किया गया तथा विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

अपने आशीर्वचन में जगतगुरु जी ने कहा कि वर्तमान समय अत्यंत संवेदनशील है। एक ओर यूजीसी के नाम पर समाज में वैचारिक संघर्ष की स्थिति उत्पन्न की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नशा भयावह रूप से फैल रहा है और देश का युवा वर्ग बर्बादी की ओर बढ़ रहा है। पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण हमारी परंपराओं पर हावी हो रहा है, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज जागृत हो रहा है और उसे सही दिशा देना संत समाज का परम दायित्व है। समाज से भेदभाव समाप्त हो, नशा उन्मूलन का व्यापक अभियान चले, गौ रक्षा हेतु सशक्त केंद्रीय कानून बने तथा भारत पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित हो — यही समय की पुकार है। सनातन धर्म का ध्वज संपूर्ण विश्व में लहराना है, जिसका आधार होगा संस्कार, संयम और राष्ट्र के प्रति समर्पण।
महाराज जी ने पूज्य संतों एवं अखाड़ा के सभी गुरु मूर्तियों को बधाई एवं साधुवाद प्रेषित करते हुए कहा कि समाज को दिशा देने का दायित्व अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती एवं आशीर्वचन के साथ हुआ। उपस्थित संत समाज एवं भक्तगणों ने इसे ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी आयोजन बताया।


