नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत की एसआईटी की टीम जांच कर रही है. इस जांच के दौरान अधिकारियों ने युवराज के रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर ऐसे दावे किए गए हैं, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. अधिकारियों का कहना है कि इंजीनियर की रेस्क्यू के लिए पौने दो घंटे का समय नहीं बल्कि आधे घंटे से भी कम का समय था जो काफी नहीं था.
इंजीनियर मामले की जांच एसआईटी की तीन सदस्यीय टीम कर रही है. इस टीम के सामने जांच के लिए पेश हुए अधिकारियों का कहना है कि युवराज के वीडियो में जो लाइट दिख रही थी वो उसके मोबाइल की नहीं बल्कि उसकी कार की थी. उन्होंने कॉल डिटेल्स का हवाला देते हुए ये दावा किया है.
दरअसल युवराज के पिता और मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने दावा किया था कि युवराज पौने दो घंटे तक मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद मांग रहा था. लेकिन, टीम का कहना है कि 12.20 बजे के बाद से युवराज की ओर से किसी तरह की हलचल नहीं थी. वीडियो में जो लाइट जलती हुई दिख रही है वो उसके मोबाइल फ़ोन की नहीं बल्कि कार की थी. उन्हें रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आधे घंटे से भी कम समय मिला जो काफी नहीं था.

युवराज मामले की जांच मंगलवार को पूरी कर ली गई है. इस जाँच में एसआईटी की टीम ने नोएडा प्राधिकरण से कुछ सवालों के जवाब लिए. ये सवाल स्पोर्स्ट्स सिटी के उस प्लॉट पर प्राधिकरण के वर्क सर्कल 10 से पहले की गई कार्रवाई को लेकर थे. वर्क सर्कल ने बताया कि बिल्डर को गड्ढे में भरे पानी को लेकर नोटिस दिया गया था. यहां होर्डिंग्स भी लगवाए गए थे जिन्हें बाद में हटवा दिया गया था.
बता दें कि 16 जनवरी की रात को गुड़गांव से लौट इंजीनियर युवराज की कार कोहरे की वजह से हादसे का शिकार हो गई थी, जिसके बाद ये कार गड्ढे में जा गिरी. इस मामले की जांच के लिए 20 जनवरी को एसआईटी की टीम का गठन किया था. सीएम योगी आदित्यनाथ भी इस घटना को लेकर गंभीर हैं. मेरठ दौरे के दौरान भी उन्होंने इसकी जाँच को लेकर जानकारी ली थी. एसआईटी जाँच की रिपोर्ट मंगलवार को पेश होनी थी लेकिन अभी तक इसे दिया गया है या नहीं इसे लेकर जानकारी नहीं मिल पाई है. इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

