NATIONAL : ‘सहमति से बनाए संबंध रेप नहीं’, हाई कोर्ट ने PCS अधिकारी पर लगे रेप के आरोपों को किया खारिज

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीसीएस अधिकारी पर लगे बलात्कार के मामले में सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से बने संबंधों को लेकर रेप नहीं माना जा सकता है. महिला द्वारा वीडियो वायरल करने, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी के आरोप पहली नगर में टिकने लायक नहीं है. जिसके बाद कोर्ट ने चार्जशीट और क्रिमिनल कार्रवाई को रद्द कर दिया.

सोमवार को जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ में इस मामले पर सुनवाई हुई. कोर्ट इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और सबूतों को ध्यान से देखा, जिसके बाद ये फैसला सुनावया है. कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो सके कि आरोपी ने पीड़िता को वीडियो वायरल करने की धमकी दी थी. दोनों एक-दूसरे से संपर्क में थे. ब्लैकमेलिंग का आरोप भी साबित नहीं हुआ है.

पीड़िता ने लगाए ब्लैकमेल कर रेप के आरोप
दरअसल ये मामला बरेली का है, जहां 1 दिसंबर 2023 को पीड़िता ने रेप की शिकायत दर्ज कराई थी, पीड़िता ने आरोप लगाया कि पीसीएस परीक्षा की तैयारी करते समय उसकी दोस्त के भाई के संपर्क में वो आई जो पीसीएस अधिकारी था. महिला का पति आर्मी में था इसलिए वो उससे दूर रहकर परीक्षा की तैयारी कर रही थी.

महिला ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने 7 अगस्त 2027 को अपने जन्मदिन के मौके पर उसे होटल में बुलाया और उसके साथ रेप किया. आरोपी ने उसका आपत्तिजनक वीडियो बना और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर अलग-अलग होटलों में कई बार रेप किया. यही नहीं आरोपी अधिकारी ने अपने कजिन के साथ भी संबंध बनाने कि लिए उस पर दबाव डाला.

पीड़िता ने कहा कि जब उसने ऐसा करने से इनकार किया तो उसने कथित तौर पर उन वीडियो को उसके परिवार वालों को भेज दिया. पीड़िता ने कोर्ट में ये माना कि उसने खुद वो आपत्तिजनक वीडियो नहीं देखे हैं जिनके जरिए उसे ब्लैकमेल किया गया. कोर्ट ने महिला के बयानों की जांच में आरोपों पर गंभीर शक जताया.

कोर्ट ने की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का कहना है कि उसने वो वीडियो नहीं देखे थे. ऐसे में ये मानना मुश्किल है कि एक शादीशुदा महिला को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लगातार शोषण किया गया. महिला और आरोपी 2017 से एक-दूसरे को जानते थे. दोनों के घर समेत कई जगहों पर मिलने के सबूत भी मिले हैं.

कोर्ट ने माना कि महिला के परिजनों को वीडियो भेजे जाने के आरोपों की भी पुष्टि नहीं हो सकती है और नहीं होटलों से कोई सीसीटीवी फुटेज मिला है. जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले में दर्ज चार्जशीट और आरोपी के खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि सहमति से बनाए संबंधों को रेप नहीं माना जा सकता है.

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