NATIONAL : 17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म, दिल्ली-NCR में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे ये 5 गंभीर सवाल

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पुलिस को दिए पीड़िता के बयान के अनुसार, बस चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी. पीड़िता का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी.

दिल्ली-NCR में एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली शर्मनाक घटना सामने आई है. यह घटना 4 अगस्त 2026 की रात की है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली एक 17 वर्षीय किशोरी अपने कजिन (भाई) से मिलने नोएडा जा रही थी.

तेज़ बारिश और अंधेरे के कारण वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर उतर गई. उसी दौरान वहां से एक खाली स्लीपर बस गुजरी. किशोरी के इशारा करने पर बस रुकी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने उसे नोएडा के सेक्टर-63 ले जाने की बात कहकर बस में बिठा लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया.

पुलिस को दिए पीड़िता के बयान के अनुसार, बस चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी. पीड़िता का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी. उस समय बस में कोई अन्य यात्री मौजूद नहीं था.

यह बस परी चौक (ग्रेटर नोएडा) से दिल्ली के कश्मीरी गेट की ओर लगभग 47 किलोमीटर तक दौड़ती रही. बस की स्लीपर बर्थ के चारों ओर पर्दे लगे थे. पुलिस जांच कर रही है कि क्या इन पर्दों की आड़ में वारदात को अंजाम दिया गया. आखिरकार आरोपियों ने पीड़िता को कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर छोड़ दिया और फरार हो गए. इसके बाद पीड़िता ने कश्मीरी गेट थाना पुलिस से संपर्क कर घटना की जानकारी दी.

पुलिस की कार्रवाई

शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को तिमारपुर बस पार्किंग इलाके से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है.

जांच में सामने आया कि बस में पहले कुछ खराबी आ गई थी, जिसके चलते उसे मरम्मत के लिए सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा) के वर्कशॉप में ले जाया गया था. मरम्मत के बाद दोनों आरोपी खाली बस को तिमारपुर ले जा रहे थे, तभी रास्ते में परी चौक पर उन्हें किशोरी मिली.

कानूनी प्रावधान

पीड़िता के नाबालिग (16 वर्ष से अधिक, 18 वर्ष से कम) होने के कारण इस मामले में सामान्य आपराधिक कानून के साथ-साथ ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012’ (POCSO Act) के कड़े प्रावधान लागू होते हैं.

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 70: यह धारा सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) से संबंधित है. यदि पीड़िता 18 वर्ष से कम आयु की है और आरोपी दोषी साबित होते हैं, तो धारा 70(2) के तहत न्यूनतम आजीवन कारावास या मृत्युदंड और जुर्माने की सजा का प्रावधान है.

POCSO Act: यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से विशेष सुरक्षा प्रदान करता है. इसके तहत गंभीर यौन हमले के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों (Special Courts) की व्यवस्था है.

जांच और प्रशासनिक चूक पर 5 बड़े सवाल
पिकेट चेकिंग पर सवाल: नोएडा से दिल्ली के बीच 47 किलोमीटर के सफर के दौरान चिल्ला बॉर्डर और मयूर विहार जैसे कई प्रमुख पुलिस चेकिंग पॉइंट आते हैं. पुलिस बल और ट्रैफिक पिकेट की मौजूदगी के बावजूद इस कमर्शियल बस की एक बार भी चेकिंग क्यों नहीं हुई?

चालान के बावजूद परिचालन की छूट क्यों?: जिस वाहन पर 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे और परमिट नियमों का लगातार उल्लंघन हो रहा था, उसे सड़कों पर बेरोकटोक चलने की अनुमति ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा कैसे दी गई?

सुरक्षा मानकों में लापरवाही क्यों?: निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत व्यावसायिक वाहनों में अनिवार्य सुरक्षा मानकों (पारदर्शी कांच, फंक्शनल सीसीटीवी, जीपीएस और पैनिक बटन) की नियमित जांच करने में परिवहन विभाग क्यों विफल रहा?

इमरजेंसी सिस्टम की विफलता: बस में ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन की वर्तमान स्थिति क्या थी? इतने लंबे रूट पर वारदात के दौरान किसी भी आपातकालीन निगरानी प्रणाली (Emergency Response Mechanism) से ऑटोमैटिक अलर्ट क्यों जारी नहीं हुआ?

ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों पर नरमी क्यों?: सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाली प्राइवेट बस ऑपरेटर कंपनियों के खिलाफ नियमित ऑडिट और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?

अधिकार क्षेत्र को लेकर पुलिस में खींचतान

घटना के बाद दिल्ली और ग्रेटर नोएडा पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद सामने आया है. ग्रेटर नोएडा पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक करने से पहले उन्हें सूचित नहीं किया था. गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, कथित घटना उनके अधिकार क्षेत्र में शुरू हुई थी.

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (नॉर्दर्न रेंज) मधुर वर्मा ने कहा, “हमने पूरी तरह से पेशेवर तरीके से काम किया है. BNS के नए कानूनी प्रावधानों के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों की ज़ीरो FIR या शिकायत कहीं भी दर्ज की जा सकती है और जांच शुरू की जा सकती है.”

निर्भया कांड से 2026 तक: क्या वाकई कुछ बदला?

यह मामला 2012 के चर्चित निर्भया कांड की याद दिलाता है. उस घटना के बाद देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों और जस्टिस जे.एस. वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट, 2013 लागू किया गया था, जिसमें स्टॉकिंग, वॉयरिज्म और यौन उत्पीड़न के खिलाफ कड़े कानून बनाए गए. इसके बाद 2018 में और कड़े संशोधन किए गए तथा ‘निर्भया फंड’ का गठन हुआ.

इसके बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक है. NCRB 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में महिलाओं के खिलाफ 4,41,534 अपराध और दुष्कर्म के 29,536 मामले दर्ज किए गए. आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि दर्ज दुष्कर्म के मामलों में 96.8% आरोपी पीड़िता के परिचित थे.

यह घटना दर्शाती है कि केवल कानून सख्त बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि सड़कों पर पुलिस पेट्रोलिंग, ट्रांसपोर्ट सेफ्टी और प्रशासनिक निगरानी की सक्रियता ही ऐसे अपराधों को रोकने में निर्णायक साबित हो सकती है.

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