NATIONAL : 43देशभर में बंद हो गए 58 इंजीनियरिंग कॉलेज, सबसे ज्यादा UP और महाराष्ट्र में, देखिए पूरी लिस्ट

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भारत में इंजीनियरिंग संस्थानों की क्वालिटी, स्टैंडर्ड बनाए रखने और सही तरीके से विकास का ध्यान रखने वाली काउंसिल AICTE ने देश के 58 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने की जानकारी दी है। इनमें सबसे ज्यादा इंजीनियरिंग संस्थान उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में 12-12 हैं। इसी के साथ 950 से ज्यादा कोर्स भी बंद हो गए हैं।

भारत में इंजीनियरिंग को बेहतर करियर ऑप्शन में गिना जाता है। यही वजह है कि हर साल IIT-JEE का क्रेज बढ़ रहा है और लाखों युवा छात्र इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम जेईई मेन में बैठते हैं। लेकिन दूसरी ओर देशभर के शहरों में इंजीनियरिंग कॉलेज ों पर ताला लगाया जा रहा है। इनमें सबसे आगे उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र हैं, जहां 12-12 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद कर दिए गए हैं।

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) के अनुसार, 2025-26 एकेडमिक ईयर के दौरान देश भर में 55 से ज्यादा इंजीनियरिंग और टेक्निकल कॉलेज बंद कर दिए गए। हालांकि मौजूदा स्टूडेंट्स को अपनी डिग्री पूरी करने की इजाजत होगी।

सिर्फ मौजूदा स्टूडेंट्स को डिग्री पूरी करने का मौका
AICTE के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘2025-26 के दौरान कुल 58 इंजीनियरिंग और टेक्निकल कॉलेज धीरे-धीरे बंद किए गए। धीरे-धीरे बंद होने (प्रोग्रेसिव क्लोजर) का मतलब है कि जिस एकेडमिक ईयर के लिए यह मंजूरी दी गई है, उस साल संस्थान पहले साल के लिए स्टूडेंट्स को एडमिशन नहीं दे सकता। हालांकि, मौजूदा स्टूडेंट्स की पढ़ाई जारी रहेगी।’

कहां-कितने इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हुए?
इन 58 संस्थानों में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बंद हुए (हर एक में 12), इसके बाद मध्य प्रदेश में आठ, और तेलंगाना और पंजाब में चार-चार संस्थान बंद हुए।

शहर का नाम बंद हुए कॉलेज की संख्या
उत्तर प्रदेश 8
महाराष्ट्र 8
मध्य प्रदेश 8
तेलंगाना 4
पंजाब 4
आंध्र प्रदेश 3
राजस्थान 3
गुजरात 2
कर्नाटक 2
पुणे 2
तमिलनाडु 2
हरियाणा 1
ओडिशा 1
उत्तराखंड 1
पश्चिम बंगाल 1

क्यों बंद हुए 58 इंजीनियरिंग कॉलेज?
AICTE कई वजहों से संस्थानों को बंद करने का आदेश देती है, जैसे स्टूडेंट्स का कम दाखिला, जरूरी फैकल्टी न रख पाना, और इंफ्रास्ट्रक्चर व कामकाज के नियमों का पालन न करना आदि। इन 58 संस्थानों में से तीन सरकारी मदद वाले थे, जबकि बाकी प्राइवेट तौर पर चलाए जा रहे थे।

इस दौरान देश भर के टेक्निकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में चल रहे 950 से ज्यादा कोर्स भी बंद कर दिए गए।
AICTE अधिकारी

AICTE ने जानकारी दी है कि ‘धीरे-धीरे बंद होने’ (प्रोग्रेसिव क्लोजर) और ‘पूरी तरह बंद होने’ (कंप्लीट क्लोजर) के बीच फर्क करती है। प्रोग्रेसिव क्लोजर में संस्थानों को धीरे-धीरे बंद किया जाता है और पहले से दाखिला ले चुके स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई पूरी करने दी जाती है, जबकि कंप्लीट क्लोजर में कोर्स पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं और प्रभावित स्टूडेंट्स को दूसरे संस्थानों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

बता दें कि AICTE, भारत में टेक्निकल एजुकेशन के लिए कानूनी तौर पर बनी नेशनल लेवल की सबसे बड़ी सलाहकार संस्था और रेगुलेटर है। यह इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, मैनेजमेंट और फार्मेसी जैसे प्रोग्राम की देखरेख करती है और क्वालिटी, स्टैंडर्ड बनाए रखने और सही तरीके से विकास सुनिश्चित करती है।

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