NATIONAL : 95 बंदरों को जहर वाला खाना देकर हाईवे के ढाबे पर छोड़ा, 15 की मौत, 80 की हालत गंभीर

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कामारेड्डी जिले के बिक्कनूर मण्डल के अंतम्पल्ली गांव के पास नेशनल हाइवे पर एक ढाबे में कम से कम 15 बंदरों की संदिग्ध जहरखुरानी से मौत हो गई. लगभग 80 बंदर बीमार पाए गए. स्थानीय लोगों और पशु चिकित्सक ने मौके पर पहुंचकर बचाव किया. सरपंच ने आरोपियों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज करने की बात कही. पशु प्रेमियों ने घटना की कड़ी निंदा की और प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की.

तेलंगाना में कामारेड्डी जिले के बिक्कनूर मण्डल के अंतम्पल्ली गांव के पास नेशनल हाइवे पर स्थित एक ढाबे में कम से कम 15 बंदरों की संदिग्ध जहरखुरानी से मौत हो गई, जबकि कई अन्य बंदर गंभीर रूप से बीमार पड़ गए. घटना की जानकारी स्थानीय लोगों ने तुरंत गांव के सरपंच और पशु चिकित्सक को दी, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर घायलों का इलाज किया और कई बंदरों की जान बचाई.

स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग 80 बंदर अत्यंत नाजुक स्थिति में पाए गए, जिन्हें चलने-फिरने में भी कठिनाई हो रही थी. मृत बंदरों के शव ढाबे के आसपास बिखरे हुए पाए गए. स्थानीय लोग यह संदेह व्यक्त कर रहे हैं कि बंदरों को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा जानबूझकर जहरीला पदार्थ खिलाया गया.इस घटना ने पशु प्रेमियों के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है. खासकर कामारेड्डी जिले के ही मचारेड्डी और बिक्कनूर मण्डलों में हाल ही में बंदरों और आवारा कुत्तों के जहर दिए जाने के आरोपों के मद्देनजर यह घटना और भी चिंता का विषय बन गई है.

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए गांव के सरपंच महेंद्र रेड्डी ने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने कथित रूप से बंदरों के एक समूह को वैन में लाकर नेशनल हाइवे के ढाबे पर छोड़ दिया. उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाएगी.

स्थानीय पशु चिकित्सक ने बताया कि बचाए गए बंदरों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति अब स्थिर है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन या पुलिस को दें.

पशु कल्याण संगठनों ने भी घटना की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है. वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है. यह घटना न केवल जानवरों के प्रति क्रूरता की ओर ध्यान आकर्षित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि ऐसे मामलों में स्थानीय समुदाय और प्रशासन की जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है.

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