NATIONAL : CDS अनिल चौहान ने अपने पैतृक गांव गवाणा में छुई जन्मभूमि, बोले- इस पल का था लंबे समय से इंतजार

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सीडीएस जनरल अनिल चौहान अपने पैतृक गांव गवाणा पहुंचे, जहां वे भावुक हो गए। उन्होंने बुजुर्गों से मिलकर कुशलक्षेम पूछी और युवाओं को प्रोत्साहित किया।

जागरण संवाददाता, श्रीनगर गढ़वाल (पौड़ी)। चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान जैसे ही अपने पैतृक गांव गवाणा की भूमि पर पहुंचे तो वह भावुक हो गए।सड़क से गांव के पंचायत चौक से लेकर घर तक के सफर में उनकी भावनाओं का ज्वार हिलोरे मार रहा था, जो उनकी भाव-भंगिमाओं से भी झलक रहा था।बुजुर्गों के गले मिलकर उनकी कुशलक्षेम पूछी तो युवाओं को पीठ थपथपा कर प्रोत्साहित करने के साथ छोटे बच्चों को पुचकारा भी।

इस मौके पर गवाणा के ग्रामीणों ने कहा कि वह सीडीएस का लंबे समय से गांव आने का इंतजार कर रहे थे, जो शुक्रवार को खत्म हो गया।पौड़ी जनपद के खिर्सू ब्लाक के चलणस्यूं पट्टी का गवाणा गांव सीडीएस अनिल चौहान का पैतृक गांव है।सीडीएस अनिल चौहान जब पहली बार अपने गांव पहुंचे तो वह उत्साहित होने के साथ भावुक भी हो रहे थे। ग्रामीणों से मिले आदर-सत्कार से वह प्रफुल्लित होकर स्वयं भी बीच-बीच में कई बार ताली बजाते रहे।

वहीं, जब भी कोई बुजुर्ग उनसे मिल रहा था वह गले लगकर उनकी कुशलक्षेम पूछ रहे थे। अपने बुजुर्गों का अभिनंदन करते हुए वह अपने रिश्ते-नाते को भी याद कर रहे थे।हम उम्र व छोटी विवाहिता बहिनों से बड़े स्नेह से मिलते हुए उन्होंने एक-एक के बारे में पूरी जानकारी ली और उनके परिवार के बारे में भी पूछा।

यही नहीं, सीडीएस ने कहा कि गांव आने का यह दिन उनके जीवन का सबसे अमूल्य क्षण है। पूर्व में भी आने के बारे में कई बार सोचा, पर नहीं आ पाया। आज, अपनी माटी को छूकर गदगद हूं।सीडीएस जब अपने पैतृक घर के आंगन में पहुंचे तो उनके चचेरे भाई दर्शन सिंह चौहान ने परंपरानुसार सीडीएस को सपत्नी तिलक लगाया और शगुन भी भेंट किया।

उनकी बहनें सतेश्वरी देवी, जयंती देवी, मंजू देवी, पम्मी देवी का कहना था कि आज वह अपने भाई व भाभी से पहली बार मिल रही हैं।भाई को टीवी चैनलों में देखा था और अखबार में फोटो देखी थी, लेकिन आज सम्मुख देखकर खुशी हो रही है। गांव की लखमा व दिगंबरी देवी ने बताया कि वह सीडीएस अनिल चौहान की रिश्ते में चाची व ताई लगती हैं।

आज अपने अफसर बेटे को पहली बार अपने सामने देख रहे हैं। सीडीएस ने भी अपनी बहनों से पूरे अपनत्व व स्नेह से भेंट की।यही नहीं, परिवार के साथ ही गांव के अन्य युवाओं से भी सीडीएस खूब उत्साह से मिलते रहे और अपनी पत्नी को भी उनके बारे में बताते रहे। सीडीएस अनिल रावत की पत्नी भी पूरी आत्मीयता के साथ स्वजनों और ग्रामीणों से मिली।

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