NATIONAL : CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, SIT जांच और SIR रद्द करने की मांग

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सुप्रीम कोर्ट में आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR को लेकर दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई होगी। याचिकाकर्ताओं ने CEC के खिलाफ जांच, कथित तौर पर बिना सामूहिक सहमति लिए लिए गए फैसलों पर कार्रवाई और देशव्यापी SIR को अवैध घोषित करने की मांग की है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में उनके और अन्य लोगों के खिलाफ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से जांच कराने और मतदाता सूची के स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन यानि SIR को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

10 महीनों में 14 आपत्तियों के खुलासे के बाद मामला कोर्ट पहुंचा
ये याचिकाएं अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद दायर की गईं, जिसमें खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची के SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

राकेश कुमार सिंह की याचिका में क्या कहा गया है?
पटना के रहने वाले राकेश कुमार सिंह की याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की शक्तियों का मुद्दा उठाया गया है। इसमें तर्क दिया गया है कि चुनाव को नियंत्रित करने का अधिकार किसी एक व्यक्ति के बजाय एक संस्था के तौर पर आयोग के पास होता है। अनुच्छेद 324(2) और 324(3) का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं और CEC इसके अध्यक्ष के तौर पर काम करते हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अध्यक्ष का पद संभालना और आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का एकतरफा इस्तेमाल करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। याचिका में कहा गया है कि शिकायत सिर्फ इस बात की नहीं है कि CEC ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया, बल्कि यह है कि उन्होंने सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति को अपने अधिकार के रूप में इस्तेमाल किया, जो याचिकाकर्ता के अनुसार आयोग की है।

SIR को अमान्य घोषित करने की मांग
राकेश कुमार सिंह की याचिका में देश भर में चल रही SIR प्रक्रिया और इसके तहत लिए गए सभी फैसलों, निर्देशों, गाइडलाइंस और कार्रवाइयों को शुरू से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि SIR प्रक्रिया के लिए कोई संवैधानिक या कानूनी आदेश नहीं था और इसे कानून के अनुसार नहीं चलाया गया था।

याचिका में CEC को सस्पेंड करने की भी मांग की गई है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता का तर्क है कि CEC को काम करने से रोका जाना चाहिए ताकि अंतिम फैसला आने तक कमीशन का मल्टी मेंबर स्वरूप बना रहे।

SIT जांच की मांग
दिल्ली के वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने एक अलग याचिका दायर की है। इसमें या तो एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय न्यायिक जांच आयोग या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने की मांग की गई है।

याचिका में चुनाव आयोग के अंदर कथित आंतरिक मतभेद और अनियमितताओं को एक गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताया गया है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कथित कानूनी उल्लंघनों के लिए जांच और आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की गई है। इसके अलावा, याचिका में तर्क दिया गया है कि संबंधित कार्य आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए दी गई छूट के दायरे में नहीं आते हैं और इसमें शामिल व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

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