NATIONAL : TMC ऑफिस पर बागी गुट ने किया कब्जा! BJP बोली- तृणमूल बंगाल में इतिहास हुई, सिर्फ भतीजा उनके साथ

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बागी विधायक गुट ने पार्टी के दफ्तर पर कब्जा किया है. गुट के नेता और पश्चिम बंगाल में नेता विपक्ष रितब्रता बनर्जी समेत 60 विधायक तृणमूल कांग्रेस के हेडक्वार्टर पहुंचे और वहां पांच मिनट तक मीटिंग भी की.

कोलकाता में टीएमसी के राजनीतिक भविष्य पर उस समय प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया था, जब पार्टी में विधानसभा चुनाव की हार के बाद फूट पड़ गई थी. पार्टी के एक धड़े ने बगावत करते हुए, खुद को औपचारिक रूप से असली टीएमसी का दर्जा दे दिया था. यह विवाद जगजाहिर भी हुआ. वहीं, चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से पूछा भी कि कौन असली टीएमसी है.

अब खबर है कि बागी विधायक गुट ने पार्टी के दफ्तर पर कब्जा कर लिया है. बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल में नेता विपक्ष रितब्रता बनर्जी समेत 60 विधायक तृणमूल कांग्रेस के हेडक्वार्टर पहुंचे और वहां पांच मिनट तक मीटिंग भी की. फिर बाहर निकलकर गेट पर ताला लटका दिया.

बागी गुट ने दावा किया है कि हम असली टीएमसी हैं. दफ्तर पर हमारा अधिकार है. इसके बाद ममता बनर्जी समर्थक टीएमसी नेता कुणाल घोष के नेतृत्व में पार्टी कार्यालय पहुंचे. जहां लगातार हंगामे की खबर है.

पूर्व नेतृत्व जनता और जमीनी कार्यकर्ताओं से कट गया: संदिपन साहा
इससे एक दिन पहले TMC विधायक संदीपन साहा ने न्यूज एजेंसी IANS से कहा था कि पूर्व नेतृत्व जनता और जमीनी कार्यकर्ताओं से कट गया था, जिससे समस्याएं पैदा हुईं. पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा था. हम चाहते हैं कि पार्टी अपनी विचारधारा के अनुरूप लोकतांत्रिक तरीके से चले, जहां हर सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर मिले. सभी की राय सुनने और चर्चा के बाद सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाए. यही हमारी इच्छा और उद्देश्य है.

वहीं, इस पूरे राजनीतिक विवाद पर बीजेपी ने भी बयान दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने टीएमसी में चल रहे अंदरूनी मतभेद पर कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में एक इतिहास बन गई है. ममता बनर्जी को सांसद छोड़ गए. विधायक छोड़ गए. कार्यकर्ता छोड़ गए. पंचायत ब्लॉक के जो उनके पंचायत समिति के मेंबर थे, वे भी छोड़ गए, मेयर छोड़ गए. सिर्फ उनका भतीजा ही उनके साथ है. तृणमूल कांग्रेस का तो बहुमत उनके खिलाफ है. ममता बनर्जी अब अल्पमत में रह गई हैं. अब यह चुनाव आयोग को तय करना है कि कौन-सी पार्टी है और उसके नेता कौन है.’

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