वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अगर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं, तो इससे 7 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। यह बड़ी राशि बुनियादी ढांचे, गरीबों के कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सार्वजनिक कार्यों में इस्तेमाल की जा सकती है।
जेपीसी की 41 सदस्यीय टीम इन दिनों गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर है। गांधीनगर के गिफ्ट सिटी में समिति ने मुख्य सचिव एमके दास, भाजपा पदाधिकारियों और विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ बैठक की। पीपी चौधरी ने गुजरात सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। यह रिपोर्ट उद्योगों, उत्पादन, मजदूरों के पलायन, रोजगार, जीएसटी संग्रह, अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर चुनाव के असर का आकलन करेगी। इस रिपोर्ट को पूरे भारत के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

चौधरी ने बताया कि अर्थशास्त्रियों के अनुसार एक साथ चुनाव कराने से देश की जीडीपी में 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी का विजन है कि चुनाव सुधारों का लाभ राष्ट्र को मिले। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व वाली समिति ने भी अपनी 18,000 पन्नों की रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। सरकार ने इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है।
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कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के छह पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने समिति को भरोसा दिया है कि इससे संघीय ढांचे या मौलिक अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं होता। समिति फिलहाल संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के 100 दिनों के भीतर ही पंचायत और नगर निकाय चुनाव भी करा लिए जाने चाहिए।

