NATIONAL : जयशंकर का बड़ा संदेश: CELAC देशों के साथ रिश्तों को नई रफ्तार देगा भारत ,अब निवेश और तकनीक पर फोकस

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई लेवल वीक 2026 के दौरान न्यूयॉर्क में भारत-CELAC विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और लैटिन अमेरिकी-कैरेबियाई देशों के बीच साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है.

जयशंकर का बड़ा संदेश: CELAC देशों के साथ रिश्तों को नई रफ्तार देगा भारत, अब निवेश और तकनीक पर फोकसजयशंकर ने सुझाव दिया कि अगले वर्ष से भारत-CELAC वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन को और व्यापक बनाया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई लेवल वीक 2026 के दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित भारत-CELAC विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ संकेत दिया कि भारत अब लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के साथ अपने संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहता है. उन्होंने कहा कि भारत और CELAC के बीच सालाना व्यापार 50 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहयोग की संभावनाएं इससे कहीं अधिक बड़ी हैं.

बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत CELAC (कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरेबियन स्टेट्स) के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने CELAC देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए भारत में आयोजित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, जैसे रायसीना डायलॉग, एआई इम्पैक्ट समिट और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी के लिए आभार जताया.

जयशंकर ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उभरकर सामने आया है. देश की जीडीपी दोगुने से अधिक बढ़ी है, विकास दर मजबूत बनी हुई है और भारत के पास बड़ा मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता, डिजिटल बुनियादी ढांचा तथा तेजी से बढ़ता बाजार है.

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उन्होंने कहा कि यही ताकत भारत को वैश्विक विकास में अधिक योगदान देने और साझेदार देशों की मदद करने में सक्षम बनाती है.

विदेश मंत्री ने भारत की ओर से CELAC क्षेत्र में किए गए सहयोग का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कैरेबियाई देशों में आजीविका से जुड़े प्रोजेक्ट्स, हरिकेन मेलिसा से प्रभावित वेनेजुएला को भेजे गए फील्ड अस्पताल और लैटिन अमेरिकी देशों को उपलब्ध कराई गई दवाएं भारत की उस सोच को दर्शाती हैं, जिसके तहत जरूरतमंद देशों के साथ विकास और मानवीय सहयोग साझा किया जाता है.


भारत और CELAC के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं. भारत तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, कुशल मानव संसाधन, डिजिटल क्षमताओं और विशाल बाजार की ताकत लेकर आता है, जबकि CELAC देशों के पास महत्वपूर्ण खनिज, टिकाऊ ऊर्जा संसाधन, कृषि उत्पाद, खाद्य संसाधन और अन्य प्राकृतिक संपदाएं हैं.

उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों का बढ़ता मध्यम वर्ग भी सहयोग की नई संभावनाएं पैदा कर रहा है. उन्होंने व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क, बेहतर कनेक्टिविटी और अधिक बाजार पहुंच की दिशा में काम करने की जरूरत है.

जयशंकर ने सुझाव दिया कि अगले वर्ष से भारत-CELAC वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन को और व्यापक बनाया जा सकता है, ताकि दोनों पक्षों के संबंधों के विभिन्न आयामों को एक मंच पर लाया जा सके.

चिली, पेरू और मर्कोसुर के साथ प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत चिली के साथ प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA), पेरू के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और मर्कोसुर के साथ प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) के विस्तार के जरिए क्षेत्र के साथ आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत ऐसे ढांचे तैयार करना चाहता है जो दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हों और जिनमें सभी देशों की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया जाए. जयशंकर ने यह भी कहा कि विकास सहयोग भारत की महत्वपूर्ण ताकत है और CELAC देशों के साथ कई कारोबारी और विकास संबंधी परियोजनाएं पहले से चल रही हैं.

उन्होंने डिजिटल क्षेत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया. उनके अनुसार, मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण भविष्य की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बन सकते हैं.

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