NATIONAL : जेन जेड के बाद अब सड़क पर ताकत दिखा रहा है जेन अल्फा, देश भर में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन

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मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली NEET और दूसरी परीक्षाओं के पेपर लीक के खिलाफ युवाओं ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था. इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था. छात्रों के इस प्रदर्शन को जेन जेड या जेन जी का प्रदर्शन बताया गया. इसके बाद झारखंड की राजधानी में भी छात्रों ने प्रदर्शन किया. इसके 24 दिन बाद झारखंड सरकार ने कई प्रतियोगी परीक्षाओं और उनके परिणाम को रद्द करने का फैसला किया. इसे जेन जी छात्रों की जीत की तरह देखा जा रहा है. वहीं इस बीच देश के कई राज्यों ने जेन अल्फा (2010 के बाद पैदा हुए बच्चों) ने भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है. ये सड़क,ट्रांसपोर्ट, बिजली-पानी और शिक्षकों की कमी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.कई राज्य सरकारों ने उनकी मांगों पर तेजी से कदम उठाकर उनकी समस्याओं का समाधान किया है.

दरअसल 2010 से 2024 के बीच पैदा हुए बच्चों को जेन- अल्फा का नाम दिया गया है. इस जेन अल्फा ने अपनी मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश,बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश तक धरना-प्रदर्शन किया है. ये युवा अपने लिए बुनियादी सुविधाएं मांग रहे हैं. जेन अल्फा का सबसे ताजा प्रदर्शन लखनऊ में हुआ. बुद्धेश्वर-मोहान रोड पर स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने सोमवार सुबह जमकर प्रदर्शन किया. ये छात्राएं शिक्षकों की कमी, खराब भोजन,खराब स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतरीं. इन छात्रों ने अपने विद्यालय परिसर से चार किमी दूर दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर हरदोई-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मूसलाधार बारिश के बीच धरने पर बैठ गईं. वहां इन छात्राओं ने नारेबाजी की. इससे वहां लंबा जाम लग गया. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और छात्राओं की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया.

उत्तर प्रदेश में जेन अल्फा का सबसे पहला प्रदर्शन फतेहपुर में हुआ था. फतेहपुर के किशनपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने स्कूल में बिजली, पंखे, शुद्ध पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, मिड-डे मील और बैठने के लिए बेंच जैसी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया था. घटना की जानकारी पाकर जिला विद्यालय मौके पर पहुंचे. उन्होंने विद्यालय का निरीक्षण कर छात्रों की सभी मांगों को तत्काल पूरा करने निर्देश दिए.

वहीं उत्तर प्रदेश के ही हमीरपुर जिले में जेन-अल्फा ने हाथों में तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया था. ये बच्चे गांव की बदहाल सड़क को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. उनका कहना था कि सड़क हमारी पढ़ाई और स्कूल के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है. उनका कहना था कि बरसात में इन बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है. अधिकारियों ने बच्चों को आश्वस्त किया कि सड़क का निर्माण कराया जाएगा. इसके बाद अधिकारी गांव में पहुंचे भी. इसका मतलब यह हुआ कि छात्रों के प्रदर्शन के बाद प्रशासन हरकत में आया.

वहीं राजस्थान में भी जेन अल्फा फार्म में चल रहा है. राजस्थान के अलवर के थानागाजी में स्कूल में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर छात्राओं ने अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे. इसका परिणाम यह हुआ कि प्रशासन को वहां सात नए टीचर तैनात करने पड़े. वहीं सिरोही में हॉस्टल के खाने की खराब गुणवत्ता को लेकर नंगे पैर पैदल चलते हुए 50 छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंच गईं.कलेक्टर ने उनकी बात सुनने के बाद जांच समिति का गठन किया और रोज खाने की गुणवत्ता जांचने का आदेश दिया.

बस का किराया बढ़ा तो छात्राओं ने कहा ‘एमएलए-जी, किराया कम करो’
मध्य प्रदेश के विदिशा में प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने बस किराया बढ़ा दिया था. वो स्कूली बच्चियों का किराया 10 रुपये की जगह 25 रुपये वसूलने लगे थे. इसके विरोध में सिरोंज बस स्टैंड पर लड़कियों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी छात्राओं ने नारा लगाया,’एमएलए-जी, किराया कम करो.’ इसके बाद अधिकारियों की दखल के बाद पुराना किराया बहाल किया गया.

इसी तरह झारखंड के गढ़वा में एक शिक्षक के तबादले के विरोध में छात्र सड़क पर उतर आए. उन्हें समझाने पहुंचे प्रखंड प्रमुख ने एक छात्र को थप्पड़ मार दिया. इससे गुस्साए छात्रों ने उनकी गाड़ी तोड़ दी.

यह तो केवल कुछ उदाहरण है, जिनमें जेन अल्फा ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया है. इसके अलावा भी कई जगह जेन अल्फा अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे. इसमें अच्छी बात यह है कि प्रशासन ने इन मामलों को संवेदनशीलता से हैंडल किया और जेन अल्फा की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया.

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