NATIONAL : ‘बस वक्त का इंतजार’: महिला आरक्षण पर पीएम मोदी ने आगे की रणनीति पर कर दिया इशारा, कहा- कल संख्याबल नहीं था

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में नारी शक्ति वंदन विधेयक, 2026 के पारित न हो पाने के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार के कम संख्याबल का भी जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प अडिग है और वह इस प्रस्ताव पर आगे काम जारी रखेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में नारी शक्ति वंदन विधेयक 2026 पारित न हो पाने के मुद्दे पर देशवासियों से बात की। पीएम ने इस दौरान विधेयक का विरोध करने के लिए विपक्ष को घेरा और साथ ही सरकार के प्रयासों के बारे में भी बताया। इस बीच पीएम मोदी ने इशारों में 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पिछले दो चुनाव से मिली कम सीटों का भी जिक्र किया और कहा कि इस बार भले ही हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन महिलाओं को संसद-विधानसभाओं में आरक्षण दिलाने का भाजपा-एनडीए का संकल्प अडिग रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभा में उनकी भागीदारी बढ़ाने से रोक नहीं पाएंगी। सिर्फ वक्त का इंतजार है। नारी शक्ति के सशक्तीकरण पर भाजपा, एनडीए का संकल्प अडिग है। कल हमारे पास संख्या बल नहीं था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं। हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे भी और मौके आएंगे। हमें आधी आबादी के सपनों के लिए देश के भविष्य के लिए इस संकल्प को पूरा करना ही है।

प्रधानमंत्री ने इससे पहले गुरुवार को लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक पेश होने के बाद विपक्ष से इसे पारित कराने के लिए सहयोग की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि राजनीतिक जीवन में जो लोग सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25 से 30 वर्ष में ग्रासरूट लेवल यानी जमीनी स्तर पर महिलाएं लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33 फीसदी का सामर्थ्य नहीं है, बल्कि वे आपके फैसलों को भी प्रभावित करने वाली हैं। इसलिए जो आज विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। राजनीतिक समझदारी इसी में है कि हम जमीनी स्तर पर महिलाओं की जो राजनीतिक लीडरशिप खड़ी हुई है, उसे संदर्भ में लें।

लोकसभा में अगर एनडीए का संख्याबल देखें तो सामने आता है कि उसके पास फिलहाल 293 सांसद हैं। इनमें अकेले भाजपा के पास 240 सांसद हैं। इसके बाद दो और पार्टियों- तेदेपा और जदयू के पास क्रमशः 16 और 12 सीटें हैं। वहीं, शिवसेना के पास सात और लोजपा के पास पांच सांसद हैं। इन पांच पार्टियों को ही मिला दें तो एनडीए बहुमत के आंकड़े के पार पहुंच जाता है। वहीं, छोटी-बड़ी सभी पार्टियों का साथ रहने पर 293 वोट एनडीए को मिलना तय हैं। शुक्रवार को जब नारी शक्ति वंदन विधेयक पर मतदान हुआ तो इसे पांच ज्यादा सांसदों का समर्थन मिला। यानी विधेयक के समर्थन में कुल 298 वोट मिले।

विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास 235 सीटें हैं, जो कि भाजपा से भी पांच सीट कम हैं। इनमें कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके पास 98 सीटें हैं। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के पास 37, तृणमूल कांग्रेस के पास 28 और डीएमके के पास 22 सीटें हैं। गठबंधन की बाकी पार्टियों के पास 10 से कम सीटें हैं। कल विधेयक पर वोटिंग के दौरान 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट किया। यानी इंडिया गठबंधन भी लगभग एकसाथ ही रहा।

चूंकि किसी भी संविधान संशोधन विधेयक, जैसे- संविधान 131वां संशोधन विधेयक (नारी शक्ति वंदन विधेयक, 2026) को संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में विशेष बहुमत से पारित होना अनिवार्य था। विशेष बहुमत का मतलब है…

ऐसे में नारी शक्ति वंदन विधेयक पर कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जिनमें 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध में वोट डाला। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट न मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका।

विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को संचालित करने के लिए लोकसभा की सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाना था। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों में वृद्धि की जानी थी।

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