NATIONAL : बीजेपी के गढ़ अजमेर में बड़ा उलटफेर: 36 साल बाद कांग्रेस ने भाजपा को दी मात, 37 वार्ड जीते; 32 पर सिमटी भाजपा

0
54

अजमेर नगर निगम चुनाव में करीब 36 साल बाद कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ते हुए 37 वार्ड जीते। भाजपा को 32 और निर्दलीयों को 11 सीटें मिलीं। कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर है। अब निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम होगी।

अजमेर नगर निगम के चुनाव परिणाम ने शहर की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। करीब 36 साल बाद कांग्रेस ने नगर निगम में भाजपा को पछाड़ दिया है। 80 वार्डों के नतीजों में कांग्रेस ने 37 वार्डों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 32 वार्ड मिले। 11 निर्दलीय प्रत्याशी भी जीतने में सफल रहे। यानी कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से सिर्फ चार सीट दूर है, जबकि भाजपा उससे पांच सीट पीछे रह गई है।

अजमेर का यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि शहर में भाजपा का राजनीतिक और संगठनात्मक नेटवर्क कांग्रेस की तुलना में मजबूत माना जाता रहा है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत, विधायक अनीता भदेल, शंकर सिंह रावत, शत्रुघ्न गौतम, वीरेंद्र सिंह और रामस्वरूप लांबा जैसे बड़े चेहरे भाजपा के साथ हैं। दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ओंकार सिंह लखावत का भी अजमेर से राजनीतिक जुड़ाव है।

इसके अलावा उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी अजमेर की प्रभारी मंत्री हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा का अजमेर लोकसभा क्षेत्र से संबंध है। सबसे अहम बात यह है कि आरएसएस के चित्तौड़गढ़ प्रांत का मुख्यालय भी अजमेर में है। ऐसे में भाजपा के लिए यह चुनाव सिर्फ नगर निगम का चुनाव नहीं था, बल्कि उसके संगठन और स्थानीय नेतृत्व की भी परीक्षा थी।

फिर कहां पिछड़ गई भाजपा?
भाजपा के मजबूत राजनीतिक नेटवर्क के बावजूद कांग्रेस का 37 वार्डों तक पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। चुनाव परिणाम संकेत दे रहा है कि स्थानीय निकाय की राजनीति में केवल बड़े नेताओं की मौजूदगी पर्याप्त नहीं रही। वार्ड स्तर पर प्रत्याशी की पकड़, स्थानीय समीकरण और संगठन की सक्रियता ने इस बार ज्यादा असर डाला

कांग्रेस ने इस चुनाव में स्थानीय स्तर पर मुकाबले को मजबूती से संभालने के लिए आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ को कमान दी थी। राठौड़ ने अजमेर में कांग्रेस के चुनाव अभियान और संगठन को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाई। कांग्रेस के लिए यह रणनीति काम करती दिखी और पार्टी ने भाजपा के मजबूत नेटवर्क के बावजूद बढ़त बना ली।

अनीता भदेल के वार्ड में भी भाजपा को झटका
भाजपा के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका वरिष्ठ विधायक अनीता भदेल के वार्ड में पार्टी की हार रही। यह नतीजा बताता है कि बड़े नेताओं का प्रभाव भी हर वार्ड में पार्टी उम्मीदवार के लिए जीत की गारंटी नहीं बन पाया। अजमेर में भाजपा के कई बड़े नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर थी। ऐसे में कांग्रेस की बढ़त को स्थानीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ बने माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।

बहुमत के लिए निर्दलीय बनेंगे अहम?
कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन 80 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 41 पार्षदों की जरूरत होगी। ऐसे में कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर है। भाजपा भी 32 सीटों के साथ कांग्रेस से पांच सीट पीछे है। यहीं 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। कांग्रेस यदि निर्दलीयों में से कम से कम चार का समर्थन जुटा लेती है तो बोर्ड बनाने की स्थिति में आ जाएगी। भाजपा के लिए भी सत्ता की दौड़ पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन उसे कांग्रेस की बढ़त को पलटने के लिए निर्दलीयों के बड़े हिस्से को अपने साथ लाना होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here