NATIONAL : रायपुर में ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’ का पर्दाफाश: चीन से आती थी हवाला रकम, अमेरिकियों से 50 करोड़ की ठगी

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रायपुर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ कर तीन अवैध कॉल सेंटरों पर छापा मारकर 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरोह अमेरिका के नागरिकों को लोन और सिबिल स्कोर सुधार के नाम पर निशाना बनाता था. पुलिस ने 67 मोबाइल, 18 लैपटॉप और 28 कंप्यूटर जब्त किए हैं. जांच में खुलासा हुआ कि पिछले दो साल में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पुलिस कमिश्नरेट ने पर्दाफाश किया है. इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन के तहत पुलिस ने तीन अवैध कॉल सेंटरों पर एक साथ दबिश देकर 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोपियों के कब्जे से 67 मोबाइल, 18 लैपटॉप, 28 कंप्यूटर और 3 वाई-फाई राउटर जब्त किए गए हैं. जांच में सामने आया है कि यह गिरोह मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर लोन और सिबिल स्कोर सुधार के नाम पर ठगी करता था. पिछले दो वर्षों में आरोपियों ने करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अमेरिकी नागरिकों से ठग ली.

पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क बेहद संगठित और पेशेवर तरीके से संचालित हो रहा था. गिरोह के तार गुजरात और चीन तक जुड़े पाए गए हैं. रायपुर के गंज थाना क्षेत्र के पिथालिया कॉम्प्लेक्स में दो कॉल सेंटर और न्यू राजेंद्र नगर के अंजनी टॉवर में एक कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था. गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए थे और एक तय प्रक्रिया के तहत ठगी को अंजाम देते थे.

पुलिस को 25 मार्च को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पूरी योजना बनाकर एक साथ तीनों कॉल सेंटरों पर छापेमारी की गई. कार्रवाई में गिरोह का पूरा नेटवर्क ध्वस्त कर दिया गया और बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण जब्त किए गए.

पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह की ठगी पांच चरणों में संचालित होती थी. पहले चरण में कॉलिंग ग्रुप सक्रिय रहता था, जो व्हाट्सएप, टेलीग्राम और ईमेल ग्रुप्स के जरिए अमेरिका के उन लोगों का डेटा खरीदता या जुटाता था जिन्होंने बैंक लोन के लिए आवेदन किया होता था. इसके बाद इंटरनेट कॉलिंग ऐप के जरिए विदेशी नंबरों पर कॉल की जाती थी. कर्मचारियों के सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर अंग्रेजी में पूरी स्क्रिप्ट लिखी रहती थी, जिससे वे पेशेवर कॉल सेंटर एजेंट की तरह बातचीत करते थे.

जैसे ही कोई व्यक्ति लोन लेने में रुचि दिखाता, उसे अगले चरण में ले जाया जाता था. दूसरे चरण में “डिपॉजिट ग्रुप” पीड़ितों से बैंकिंग जानकारी जैसे अकाउंट डिटेल और ईमेल हासिल करता था. इसके बाद उन्हें बताया जाता कि उनका CIBIL स्कोर खराब है और लोन तुरंत पास नहीं हो सकता. कुछ समय बाद कॉल कर भरोसा दिलाया जाता कि उनकी कंपनी सिबिल स्कोर सुधार सकती है. पीड़ित की पूरी जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की जाती थी, जिसमें अहमदाबाद में बैठे मास्टरमाइंड और विदेश में मौजूद सदस्य जुड़े रहते थे.

तीसरे चरण में “टेक्निकल ग्रुप” फर्जी क्लोन चेक तैयार करता था. बैंक की प्रक्रिया की कमजोरी का फायदा उठाते हुए छोटी राशि का चेक खाते में दिखाया जाता था. जांच में सामने आया कि यह तकनीकी काम चीन में बैठे नेटवर्क द्वारा किया जाता था, जो ठगी की रकम का करीब 10 प्रतिशत कमीशन लेते थे.

जैसे ही पीड़ित के खाते में रकम दिखाई देती, कॉलिंग ग्रुप दोबारा सक्रिय हो जाता था. पीड़ित को बताया जाता कि उनके खाते में टेस्ट के तौर पर 100 डॉलर जमा किए गए हैं और अब कंपनी का पैसा वापस करना होगा. इसके लिए पीड़ितों से एप्पल, गूगल और अमेजन जैसे गिफ्ट कार्ड खरीदकर कोड साझा करने को कहा जाता था.

इसके बाद “रिडीम ग्रुप” इन गिफ्ट कार्ड्स को अलग-अलग वेबसाइट और चैनलों के माध्यम से तुरंत कैश में बदल देता था. रकम हवाला के जरिए भारत भेजी जाती थी और अंततः अहमदाबाद में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचती थी. पूरी रकम की जानकारी केवल मास्टरमाइंड और रिडीम ग्रुप को होती थी.

गिरोह पीड़ितों को डराने के लिए “डिजिटल अरेस्ट” का भी इस्तेमाल करता था. फर्जी अरेस्ट वारंट भेजकर तत्काल भुगतान का दबाव बनाया जाता था, जिससे कई लोग मानसिक दबाव में आकर पैसे दे देते थे.

इस मामले में गंज थाना और न्यू राजेंद्र नगर प्रकरण में कुल 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. गंज थाना प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों में अनिल कुमार यादव उर्फ रोहित यादव, सौरभ राजपूत, अभिषेक शर्मा, रोहित शर्मा, सोनू कुमार भारती, राहुल प्रजापति, मयुर खडपे, नितेश गुरूंग, अजय चौधरी, आदित्य कुमार, सागर कायस्थ, निखिल क्षत्रिय, चुन्ना पटेल, मोहम्मद अल्तमस, विष्णु कुशवाह, ऋभ राज, दिनेश लालवानी, अनिकेत दुबे, काजल आचार्यजी, प्रकाश द्विवेदी, दीप सिंह यादव, सत्यम तिवारी, मोहम्मद गुफरान हुसैन, ओम कोढवले, राजेन्द्र सिंह जाला, शाह अमन, राज द्विवेदी, शिवम पांडे, ऋषभ यादव, करन परमार, अमन पांडे, रोहित कुमार चंचल और देवेश द्विवेदी शामिल हैं.

न्यू राजेंद्र नगर प्रकरण में गौरव यादव, अभिषेक राजपूत, अमरेन्द्र राजपूत, गुरप्रीत सिंह, मनीष पाल उर्फ मोनू, प्रताप सिंह, अजय सिंह राजपूत, राकेश राजभर और उत्तम दुबे गिरफ्तार किए गए हैं. पुलिस के अनुसार गिरोह में गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मेघालय, हरियाणा और पंजाब के युवक शामिल थे. तीनों कॉल सेंटरों का संचालन सुपरवाइजर रोहित यादव, गौरव यादव और सौरभ सिंह कर रहे थे.

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